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दिग्गज फिल्म निर्माता और सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन
निर्माता और सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी नहीं रहे

दिग्गज फिल्म निर्माता और सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन

Jun 04, 2026
11:59 am

क्या है खबर?

बॉलीवुड से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन हो गया है। उन्होंने 76 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। पहलाज पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे, जिसके बाद उनका निधन हो गया। उनके जाने की खबर मिलते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री में सन्नाटा पसर गया है।

दुखद

लिवर से जुड़ी बीमारी से पीड़ित थे निर्माता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहलाज पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और लिवर से जुड़ी बीमारी से भी पीड़ित थे। पहलाज निहलानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक बेहद रसूखदार और चर्चित चेहरे थे, जिन्होंने बतौर निर्माता बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दीं। उनके बैनर तले 'आंखें', 'अंदाज', 'तलाश', 'रंगीला राजा' और 'जूली 2' जैसी कई बड़ी फिल्मों का निर्माण हुआ था। पहलाज का अंतिम संस्कार 4 जून को मुंबई में किया जाएगा

पुष्टि

करीबी दोस्त अतुल मोहन ने जताया दुख

पहलाज के निधन की दुखद खबर की पुष्टि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने भी की है। उनके साथ सेंसर बोर्ड में काम कर चुके मशहूर ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन ने गहरा दुख जताते हुए कहा, "ये मेरे लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत नुकसान है। बस 10 दिन पहले ही मेरी उनसे बात हुई थी। उन्हें लिवर की कुछ समस्या थी। हम दोनों बहुत करीब थे, और हैरान करने वाली बात ये है कि वो शराब भी नहीं पीते थे।"

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रुतबा

पहलाज के रुतबे पर बोले अतुल मोहन

अतुल बोले, "मुझे वो समय अच्छी तरह याद है, जब फिल्म वितरक चाहते थे कि बस कैसे भी एक फिल्म पहलाज जी से बन जाए, क्योंकि वो जिस फिल्म को छूते थे, वह सोना बन जाती थी। यहां तक कि जब वो बोर्ड के अध्यक्ष बने, तब भी उन्होंने हमेशा ये सुनिश्चित किया कि फिल्मकारों को उनकी फिल्मों का सर्टिफिकेट समय पर मिल जाए। इसके लिए वो इतने समर्पित थे कि रविवार को भी फिल्मों की स्क्रीनिंग रखवा देते थे।"

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चर्चा

बतौर CBFC अध्यक्ष सुर्खियों में छाए रहे पहलाज 

पहलाज ने साल 2015 से 2017 के बीच सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। उनका ये कार्यकाल फिल्मों में सेंसरशिप और सर्टिफिकेशन को लेकर हुए विवादों और बहसों के कारण अक्सर मीडिया की सुर्खियों में बना रहता था। बोर्ड प्रमुख के रूप में उनके कई फैसलों ने फिल्म इंडस्ट्री में बहस को जन्म दिया, जिसने उन्हें हाल के वर्षों में सेंसर बोर्ड के सबसे चर्चित अध्यक्षों में से एक बना दिया था।

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