कान्स फिल्म फेस्टिवल में गूंजी झारखंड की कहानी, पर्दे पर उतरी प्रकृति और इंसान की जंग
देबादित्य बंदोपाध्याय द्वारा निर्देशित फिल्म 'पेड़ चलता है' का 14 मई 2026 को 79वें कान फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ। झारखंड के पलामू जिले की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म वहां के स्थानीय समुदायों के जीवन, उनकी यादों और अस्तित्व के संघर्ष को खूबसूरती से दिखाती है।
फिल्म की खास बात यह है कि निर्देशक ने इसे बिल्कुल असली और प्राकृतिक रखने के लिए सिनेमाई चमक-धमक से दूर रखा है। कान्स जैसे बड़े मंच पर अपनी फिल्म की सराहना होते देख निर्देशक ने इसे एक भावुक और गर्व महसूस कराने वाला अनुभव बताया। ये फिल्म प्रकृति और इंसान के गहरे रिश्ते को पर्दे पर उतारती है।
जंगल विस्थापन की समस्या उठाती है 'पेड चलता है'
ये फिल्म पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन और विस्थापन (लोगों का अपने घर से बेदखल होना) जैसे गंभीर मुद्दों को उठाती है। भारत के जंगली इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए ये आज की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं।निर्देशक बंदोपाध्याय का मानना है कि 'कान' जैसे बड़े मंच पर फिल्म के आने से भारत की पर्यावरण से जुड़ी कहानियों को पूरी दुनिया में पहचान मिलेगी। उन्होंने इस उपलब्धि को झारखंड और भारतीय सिनेमा, दोनों के लिए एक बड़ी जीत और गर्व का मौका बताया है।