
जयंती विशेष: कॉमेडी से लेकर सस्पेंस तक, ये हैं सुनील दत्त की सदाबहार फिल्में
क्या है खबर?
अभिनेता सुनील दत्त ने अपनी कलाकारी से हिंदी सिनेमा को नए स्तर पर पहुंचाया था। उनकी कई फिल्में आज भी हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक हैं।
कॉमेडी से लेकर सस्पेंस तक, उन्होंने पर्दे पर हर तरह के किरदार निभाए। कभी वह एक बेवफा प्रेमी के रूप में नजर आए, कभी बेबस बेटे तो कभी गंभीर पिता के रूप में।
सुनील का जन्म 6 जून, 1929 को हुआ था। आइए, नजर डालते हैं उनकी सदाबहार फिल्मों पर।
#1
'मदर इंडिया'
'मदर इंडिया' की गिनती हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में होती है।
1957 की इस फिल्म में सुनील, नरगिस के साथ नजर आए थे। कहा जाता है कि इस फिल्म ने ही दत्त और नरगिस को पास लाने का काम किया था। फिल्म की रिलीज के अगले साल दोनों ने शादी कर ली थी।
फिल्म में सुनील के किरदार बिरजु के जरिए, गरीबी और उसके संघर्षों को दिखाया गया था।
यह ऑस्कर के लिए नामांकित हुई पहली भारतीय फिल्म थी।
#2
'पड़ोसन'
'पड़ोसन' बॉलीवुड की यादगार कॉमेडी फिल्म है। 1968 में आई इस फिल्म ने दर्शकों को खूब लोटपोट किया था।
इस क्लासिक कॉमेडी फिल्म में सुनील, सायरा बानो के साथ नजर आए थे। फिल्म में सुनील का किरदार भोला, अपनी सादगी, सरलता और हास्य के लिए याद किया जाता है।
फिल्म में महमूद और किशोर कुमार भी नजर आए थे।
फिल्म 'मेरे सामने वाली खिड़की', 'एक चतुर नार' जैसे गानों के लिए भी याद की जाती है।
#3
'मेरा साया'
1966 में आई फिल्म 'मेरा साया' में सुनील और साधना मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
फिल्म में सुनील एक वकील राकेश के किरदार में नजर आए थे। राकेश को गीता नाम की एक लड़की से प्यार हो जाता है। हालांकि, उसकी जिंदगी तब तबाह हो जाती है, जब एक एक्सीडेंट में गीता की मौत हो जाती है।
इसके बाद राकेश को गीता की एक हमशक्ल मिलती है और कहानी नया मोड़ ले लेती है।
#4
'गुमराह'
1964 में आई बीआर चोपड़ा की फिल्म 'गुमराह' में सुनील दत्त, अशोक कुमार और माला सिन्हा नजर आए थे।
फिल्म मीना नाम की एक लड़की की कहानी थी। फिल्म में उसे सुनील के किरदार से प्यार हो जाता है, लेकिन उसे पता चलता है कि वह पहले से ही शादीशुदी है।
फिल्म को उसके रोचक प्लॉट और सस्पेंस के लिए याद किया जाता है। फिल्म में सुनील और माला सिन्हा की खूब प्रशंसा हुई थी।
मुन्नाभाई
'मुन्नाभाई MBBS'
'मुन्नाभाई MBBS' 2003 में आई थी। फिल्म में संजय दत्त के साथ अरशद वारसी मुख्य भूमिका में थे।
फिल्म में सुनील, संजय के किरदार मुन्ना के पिता के रूप में नजर आए थे। असल बाप-बेटे की जोड़ी को पर्दे पर देखना दर्शकों के लिए दिलचस्प था। फिल्म में संजय एक ऐसे बेटे के किरदार में थे, जो पिता के कहने पर MBBS की पढ़ाई करता है। वह पढ़ाई तो ठीक से नहीं करता लेकिन मरीजों का दिल जीत लेता है।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
2005 में अपने जन्मदिन से महज 12 दिन पहले सुनील दत्त को दिल का दौरा पड़ा था और उनका निधन हो गया था। 25 मई, 2005 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था।