रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच मतभेद क्यों गहराए? ये मांग बनी विवाद की जड़
क्या है खबर?
रणवीर सिंह पिछले कुछ समय से फिल्म 'डॉन 3' को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में आई एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर इस प्रतिष्ठित फ्रैंचाइजी में अपने किरदार को एक नई गहराई और आक्रामकता देना चाहते थे। बताया जा रहा है कि रणवीर ने निर्देशक फरहान अख्तर से फिल्म की पटकथा में कुछ बदलाव करने और संवादों में कठोर और प्रभावशाली भाषा का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था।
ूमकू
'गाली देने वाला' डॉन चाहते थे रणवीर सिंह?
फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, 'डॉन 3' को लेकर रणवीर और निर्देशक फरहान अख्तर के बीच बातचीत सिर्फ स्क्रिप्ट तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि रणवीर की कुछ अजीब शर्तों ने इस प्रोजेक्ट में दरार पैदा कर दी। सबसे बड़ी शर्त ये थी रणवीर का अपने किरदार के लिए कठोर और गाली-गलौज वाली भाषा का उपयोग करने का सुझाव। रणवीर का मानना था कि उनके वर्जन का 'डॉन' थोड़ा अधिक आक्रामक होना चाहिए, जिसमें 'कठोर भाषा' का इस्तेमाल हो।
समझौता
फ्रेंचाइजी की 'मूल भावना' से समझौता नहीं करना चाहते थे फरहान
अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान द्वारा निभाए गए 'डॉन' के किरदार हमेशा से जेम्स बॉन्ड की तरह सभ्य, शालीन और चतुर रहे हैं। इन फिल्मों में कभी भी 'अभद्र भाषा' का इस्तेमाल नहीं हुआ, जो कि इस फ्रेंचाइजी की पहचान रही है। फरहान इस फ्रेंचाइजी की मूल भावना को बनाए रखना चाहते थे। रणवीर की इस मांग और अन्य शर्तों के कारण फिल्म की शूटिंग और भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे।
पहचान
घातक, जानलेवा पर 'अभद्र' नहीं, यही है 'डॉन' का असली पहचान
1978 में चंद्रा बारोट के निर्देशन में बनी 'डॉन' में अमिताभ ने दोहरी भूमिका निभाई थी। एक किरदार सीधा-सादा ग्रामीण था, दूसरा 'एंटी-हीरो' जेम्स बॉन्ड जैसी विशेषताओं वाला एक अंडरवर्ल्ड किंगपिन था। वो खतरनाक था, उसे पकड़ना नामुमकिन था, लेकिन वो 'बदतमीज' या 'अभद्र' नहीं था। शाहरुख का डॉन घातक और जानलेवा तो था, लेकिन उसने कभी भी गाली-गलौज या अश्लील व्यवहार नहीं किया। यही इस फ्रेंचाइजी की पहचान रही, एक ऐसा अपराधी जिसके पास 'क्लास' और 'स्वैग' हो।
हिंसा
'धुरंधर' जैसी हिंसा और गाली-गलौज चाहते थे रणवीर
रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' (जो अपनी हिंसा और बेबाक भाषा के लिए चर्चा में रही) की भारी सफलता के बाद ये महसूस कर रहे थे कि 'डॉन' के किरदार को भी आज के 'हिंसक' मानकों के हिसाब से बदलना चाहिए। जहां मौजूदा दर्शक ऐसे आक्रामक सिनेमा को पसंद कर रहे हैं, वहीं फरहान 'डॉन' की उस जेम्स बॉन्ड जैसी शालीन पहचान को खत्म नहीं करना चाहते थे। यही वैचारिक मतभेद विवाद की जड़ बना।