तिग्मांशु धूलिया ने शहरी प्रेम कहानियों से की तौबा, बोले- आजकल की रोमांटिक फिल्में मैं देखता भी नहीं
निर्देशक तिग्मांशु धूलिया (फिल्म 'पान सिंह तोमर' के निर्देशक) ने साफ कह दिया है कि उन्हें शहरों की साधारण लव स्टोरी पर फिल्में बनाना बिल्कुल पसंद नहीं है।
हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि ऐसी रोमांटिक फिल्में उन्हें तब तक आकर्षित नहीं करतीं, जब तक कि उनमें कोई बड़ा सामाजिक या सांस्कृतिक मुद्दा न जुड़ा हो। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे कभी ऐसी फिल्में बनाएंगे तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, "बिल्कुल नहीं।"
धूलिया की पसंद सामाजिक जड़ों से जुड़ी प्रेम कहानियां
धूलिया का मानना है कि फिल्मों को सिर्फ रोमांस पर ध्यान देने के बजाय ऐसे खास मुद्दों पर बात करनी चाहिए जो दुनिया भर में मायने रखते हैं।
उन्होंने 'मुगल-ए-आजम' और 'एक दूजे के लिए' जैसी पुरानी फिल्मों का उदाहरण दिया। उनके हिसाब से इन फिल्मों में प्रेम कहानियों को बड़े सामाजिक टकरावों के साथ खूबसूरती से जोड़ा गया था।
धूलिया के शब्दों में, "जब तक कोई प्रेम कहानी 'मुगल-ए-आजम' या 'एक दूजे के लिए' जैसी न हो, जिसमें भाषा या सांस्कृतिक टकराव शामिल हो, तब तक उस पर फिल्म बनाना ठीक नहीं। आज की प्रेम कहानियों पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि मैं उन्हें देखता ही नहीं हूं।"