अनुराग कश्यप ऑस्कर चयन समिति पर भड़के, बोले- राजनीति के चक्कर में चूकता है भारत
क्या है खबर?
भारत ने आगामी ऑस्कर 2027 के लिए मराठी फिल्म 'गोंधल' को अपनी आधिकारिक प्रविष्टि चुना है। देश के लंबे इतिहास में अब तक सिर्फ 'मदर इंडिया', 'सलाम बॉम्बे' और 'लगान' ही अंतिम नामांकन तक पहुंच सकी हैं। पिछले साल करण जौहर की 'होमबाउंड' ने शॉर्टलिस्ट में जगह तो बनाई, पर फाइनल रेस से बाहर हो गई। इसी चयन प्रक्रिया पर अब फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का बेबाक बयान आया है, जिन्होंने भारत के फिल्म चयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
आरोप
ऑस्कर चयन प्रक्रिया में होती है गंदी राजनीति?
वैरायटी इंडिया के साथ एक खास बातचीत में अनुराग ने कहा कि जब भी भारत के पास 'द लंचबॉक्स' या 'ऑल वी इमेजिन एज लाइट' जैसी सही फिल्मों को चुनने का मौका था, तब फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने सब गड़बड़ कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि FFI द्वारा इन दोनों फिल्मों को जानबूझकर नहीं चुना गया। जब उनसे पूछा गया कि क्या चयन प्रक्रिया अत्यधिक राजनीति से प्रभावित थी तो निर्देशक ने पूर्ण सहमति जताई।
कारण
जागरूकता की कमी से पिछड़ती हैं भारतीय फिल्में- अनुराग
अनुराग ने चयन प्रक्रिया में जागरूकता की कमी की बात कही। वो बोले, "इस साल मुकाबला बेहद कड़ा है और ऑस्कर में अन्य देशों की अंतरराष्ट्रीय प्रविष्टियों को पछाड़ना काफी मुश्किल होगा। ऑस्कर की पात्रता के लिए सबसे मुख्य शर्त ये होनी चाहिए कि फिल्म भारत के बाहर किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी हो या फिर साल खत्म होने से पहले उसे कोई अमेरिकी डिस्ट्रीब्यूटर मिल गया हो।"
दो टूक
"बिना अमेरिकी वितरकों के ऑस्कर में टिकना नामुमकिन"
इस साल की भारतीय प्रविष्टि 'गोंधल' को लेकर अनुराग ने सलाह दी कि इस फिल्म के निर्माताओं को इसे दुनियाभर के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में स्क्रीन कराने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि बिना अंतरराष्ट्रीय स्क्रीनिंग या अमेरिकी वितरकों के ऑस्कर की रेस में टिकना नामुमकिन है, इसलिए पहला कदम यही होना चाहिए, वरना प्रचार और स्क्रीनिंग पर खर्च किया गया सारा पैसा पूरी तरह पानी में चला जाता है।
सवाल
अनुराग कश्यप ने संस्था के काम करने के तरीके पर उठाए सवाल
अनुराग ने कहा कि IFFI में जीत के बाद अब राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) को 'गोंधल' को अंतरराष्ट्रीय समारोहों में भेजना चाहिए।
उन्होंने कहा, "चूंकि निर्माताओं को इस प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं होती, इसलिए NFDC को आगे आकर कमान संभालनी चाहिए। NFDC बिना किसी ठोस मकसद के हर फेस्टिवल में जाती है, जबकि उन्हें सिर्फ मार्केट लगाने के बजाय देश से बाहर न दिखाई गई फिल्मों को बड़े फेस्टिवल्स के मुख्य मंच तक पहुंचाने का लक्ष्य रखना चाहिए।"