अनुराग कश्यप का सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी पर वार- बिना देखे ही अटका दी 'सतलुज'
क्या है खबर?
मशहूर निर्देशक अनुराग कश्यप ने सेंसर बोर्ड (CBFC) के खिलाफ एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि फिल्म 'सतलुज' के निर्देशक हनी त्रेहान ने उन्हें खुद बताया कि सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने फिल्म को देखे बिना ही उसे पास करने से इनकार कर दिया और उसकी रिलीज पर रोक लगा दी। बिना फिल्म देखे उस पर आपत्ति जताने के इस आरोप ने अब सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
विवाद
रिलीज होते ही बैन हो गई फिल्म
अनुराग अपने पूर्व सहयोगी हनी त्रेहान की थ्रिलर फिल्म 'सतलुज' पर लगे हालिया प्रतिबंध के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं।
दिलजीत दोसांझ अभिनीत ये फिल्म पिछले 3 साल से सेंसरशिप की लंबी लड़ाई लड़ रही है।
इस विवाद के सबसे नए अध्याय में इसी महीने की शुरुआत में रिलीज होने के महज कुछ ही दिनों के भीतर इस फिल्म को दुनियाभर में OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दिया गया।
बयान
हनी त्रेहान संग बातचीत का हवाला देकर क्या बोले अनुराग?
अब अनुराग ने हनी त्रेहान संग हुई एक निजी बातचीत का हवाला देते हुए बड़ा खुलासा किया है। कश्यप के अनुसार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष और गीतकार-पटकथा लेखक प्रसून जोशी ने 'सतलुज' की रिलीज पर आपत्ति जताने से पहले इसे देखा तक नहीं था।
अनुराग बोले, "हनी का कहना है कि प्रसून जोशी को फिल्म से आपत्तियां थीं, जबकि उन्होंने फिल्म देखी ही नहीं थी। मैं जानता हूं कि अन्य मामलों में भी अध्यक्ष फिल्म नहीं देखते हैं।"
आरोप
अनुराग ने याद किया 'बॉम्बे वेलवेट' का सेंसर विवाद
कश्यप ने प्रसून की कम भागीदारी की पुष्टि करते हुए याद किया कि कैसे पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने 2015 की उनकी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' के सभी कट्स की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी।
यहां तक कि निहलानी रिवाइजिंग कमेटी में भी बैठे थे, जबकि CBFC प्रमुख को वहां बैठने की अनुमति नहीं होती है।
उन्होंने निर्माताओं के लिए 'फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण' (FCAT) जाने की प्रक्रिया में भी देरी की थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
सवाल
फिल्मों पर रोक पर चुप्पी क्यों?
अनुराग ने कहा कि प्रसून जोशी सेंसर बोर्ड का मुख्य चेहरा हैं, फिर भी फिल्मों पर रोक लगने पर उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। अनुराग के मुताबिक, FCAT को खत्म करके इस व्यवस्था को बेहद जटिल बना दिया गया है।
सरकारी दफ्तर केवल दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं, इसलिए किसी एक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
बता दें कि प्रसून को 2017 में CBFC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने दिवंगत निर्माता पहलाज निहलानी की जगह ली थी।