ब्रुकफील्ड भारत की ग्रीन एनर्जी पर लगा रही अरबों रुपये का दांव
ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट भारत में नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ा रही है। इसकी बड़ी वजह देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती मांग है।
दरअसल, भारत में डाटा सेंटर्स दुनिया की AI सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करेंगे, जिसके लिए भरोसेमंद और ग्रीन एनर्जी की जबरदस्त जरूरत होगी।
ब्रुकफील्ड के मैनेजिंग पार्टनर नवल सैनी ने बताया है कि सिर्फ एक बड़े AI डाटा सेंटर को बिजली देने के लिए बैकअप के तौर पर मौजूदा क्षमता से 9 गुना ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता तैयार करनी पड़ सकती है।
बैटरी स्टोरेज का कर रही विस्तार
ब्रुकफील्ड भारत में पहले से ही 32 अरब डॉलर (करीब 3,000 अरब रुपये) से ज्यादा की संपत्ति (एसेट्स) संभाल रहा है और 45 गीगावाट से ज्यादा के ग्रीन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।
इसी दिशा में कंपनी बैटरी स्टोरेज को भी तेजी से बढ़ा रही है, ताकि जब रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन कम हो, तब भी बिजली की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक भारत में स्टोरेज की मांग 336.7GWh तक पहुंच सकती है। ब्रुकफील्ड ने क्लीन मैक्स जैसी कंपनी में भी निवेश किया है, जिसकी लगभग आधी कमाई मेटा जैसे कंपनियों से आती है।
इसके साथ ही, कंपनी ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट्स में भी पैसा लगा रही है। इसका मकसद भारत को फर्टिलाइजर (उर्वरक) के आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने में मदद करना है। ये सभी कदम भारत के तकनीकी भविष्य को और भी ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।