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शेयर बाजार, सोना-चांदी और क्रिप्टो में क्यों देखने को मिल रहा बिकवाली का दबाव?
सोना-चांदी और क्रिप्टो में बिकवाली

शेयर बाजार, सोना-चांदी और क्रिप्टो में क्यों देखने को मिल रहा बिकवाली का दबाव?

Feb 02, 2026
02:59 pm

क्या है खबर?

भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजारों में आज (2 फरवरी) उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार के साथ-साथ सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट और क्रिप्टोकरेंसी का मूल्य भी लुढ़कता नजर आ रहा है। दुनियाभर के निवेशक तेजी से बिकवाली कर रहे हैं। कमजोर भरोसे, सख्त आर्थिक हालात और नीतिगत अनिश्चितता ने बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर एक साथ कई एसेट क्लास पर दिख रहा है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं।

बाजार अस्थिरता

बजट के बाद भारतीय बाजार में अस्थिरता

बजट के एक दिन बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेड पर टैक्स बढ़ने के फैसले से निवेशकों में बेचैनी बढ़ा दी है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में हलचल देखने को मिल रहा है। पहले दिन करीब 2 फीसदी गिरावट के बाद बाजार थोड़े संभले, लेकिन भरोसा कमजोर बना रहा। निवेशक अब बड़े ऐलान से ज्यादा बजट की बारीक बातों, आने वाले नतीजों और वैश्विक संकेतों पर ध्यान दे रहे हैं।

शेयर बाजार

शेयर बाजार में बिकवाली क्यों बढ़ी?

शेयर बाजार में बिकवाली की एक बड़ी वजह निवेशकों की बढ़ती चिंता है। विदेशी निवेश आकर्षित करने वाले ठोस कदमों की कमी और सरकार के ज्यादा कर्ज लेने की योजना से डर बढ़ा है। दुनिया के कई बड़े बाजारों में भी तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे जोखिम लेने की इच्छा कम हो गई। जब वैश्विक माहौल कमजोर होता है, तो निवेशक पहले शेयर बेचते हैं। इसी वजह से भारत सहित एशियाई बाजारों में दबाव बढ़ा है।

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सोना-चांदी

सोना-चांदी और तेल की कीमतें क्यों गिरीं?

धातुओं और कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। डॉलर मजबूत होने और ऊंचे स्तर से मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी सस्ते हुए और निवेशकों ने तेजी से बिक्री की है। वहीं कच्चे तेल में गिरावट की वजह वैश्विक तनाव में कमी और सप्लाई को लेकर राहत रही। जब बाजार को लगता है कि जोखिम कम हो रहा है, तो तेल की कीमतें नीचे आती हैं। गैस की कीमतों में भी मौसम के कारण तेज गिरावट दर्ज की गई।

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क्रिप्टो

क्रिप्टो, बॉन्ड और करेंसी पर दबाव

क्रिप्टोकरेंसी में भी गिरावट का दौर जारी रहा क्योंकि नकदी को लेकर डर बढ़ा है। बिटकॉइन और दूसरी डिजिटल मुद्राएं कमजोर पड़ीं, क्योंकि सख्त आर्थिक माहौल में जोखिम वाले निवेश सबसे पहले प्रभावित होते हैं। बॉन्ड बाजार में ज्यादा सरकारी उधारी की वजह से यील्ड बढ़ीं और कीमतें गिरीं। डॉलर मजबूत हुआ, जिससे कई देशों की मुद्राओं पर दबाव आया। हालांकि, कच्चे तेल के सस्ता होने से भारतीय रुपया कुछ संभला, लेकिन कुल मिलाकर बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।

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