ICAI का विवाहित जोड़ों के लिए कौनसा टैक्स प्रस्ताव दिया है और इससे क्या फायदा होगा?
क्या है खबर?
देश में 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 में विवाहित जोड़ों के लिए कुछ अच्छी खबर आ सकती है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने पति-पत्नी के लिए वैकल्पिक संयुक्त कराधान (संयुक्त आय पर टैक्स) शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। यदि वित्त मंत्रालय इसे स्वीकार करता है, तो इससे व्यक्तिगत आयकर में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है। यह कदम विवाहित करदाताओं के लिए बड़ी राहत होगी और उन्हें अधिक बचत करने में मदद मिलेगी।
प्रस्ताव
ICAI ने क्या दिया है प्रस्ताव?
वर्तमान इनकम टैक्स प्रणाली में प्रत्येक व्यक्ति की कमाई पर अलग-अलग टैक्स लगाया जाता है। सभी को अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना होता है। पति-पत्नी दोनों को अपनी आय पर अलग-अलग छूट, कर स्लैब और कटौतियां मिलती हैं। ICAI ने विवाहित जोड़ों को अपनी आय को मिलाकर एक ही ITR दाखिल करने की अनुमति देने का सुझाव दिया है। संस्थान ने इसे केंद्रीय बजट 2026 में वैकल्पिक प्रणाली के रूप में शामिल करने की सिफारिश की है।
कार्य
संयुक्त कराधान कैसे काम करेगा?
विवाहित दंपति संयुक्त फाइलिंग विकल्प के तहत समेकित आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। ICAI ने टैक्स श्रेणियों में पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया है। इसमें 8 लाख रुपये तक कोई टैक्स न लगाने, 8-16 लाख तक 5 प्रतिशत, 16 से 24 लाख तक 10 प्रतिशत, 24 से 32 लाख तक 15 प्रतिशत, 32 से 40 लाख तक 20 प्रतिशत, 40 से 48 लाख तक 25 प्रतिशत और 48 लाख रुपये से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स का सुझाव दिया है।
समायोजन
अधिभार की सीमा में कैसे होगा समायोजन?
प्रस्ताव के तहत, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौतियों, छूट और अधिभार की सीमा में समायोजन हो सकता है। इसमें संयुक्त कराधान में बढ़ी हुई अधिभार सीमा और अलग-अलग मानक कटौतियों का प्रस्ताव शामिल है। ICAI ने एकल आयकर्ताओं के लिए अधिभार लगाने की सीमा को 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने और विवाहित जोड़ों के लिए संयुक्त कराधान के तहत इसे 1.50 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया है।
सिफारिश
अधिभार दरों में संशोधन की भी सिफारिश
रिपोर्ट्स के अनुसार, ICAI ने विवाहित जोड़ों की संयुक्त आय के आधार पर अधिभार दरों में संशोधन करने की भी सिफारिश की है। इसके तहत कुल आय के 1.50 करोड़ से 3 करोड़ रुपये के बीच में होने पर अधिभार कुल टैक्स का 10 प्रतिशत हो सकता है। इसी तरह 3 से 5 करोड़ रुपये की आय वालों के लिए अधिभार कुल टैक्स का 15 प्रतिशत और 5 करोड़ रुपये से अधिक आय पर यह 25 प्रतिशत हो सकता है।
आवश्यकता
संयुक्त कराधान की आवश्यकता क्यों है?
यदि भारत संयुक्त कराधान प्रणाली को अपनाता है, तो वह अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो विवाहित जोड़ों को संयुक्त आयकर रिटर्न दाखिल करने की अनुमति देते हैं। संयुक्त कराधान से कुल कर दायित्व कम हो सकता है, खासकर उन परिवारों के लिए जो केवल एक कमाने वाले पर निर्भर हैं। TOI के अनुसार, संयुक्त कराधान के तहत छूट की सीमा और प्रभावी कर दायित्व अधिक अनुकूल होने की उम्मीद है।
बयान
ICAI ने संयुक्त कराधान प्रणाली के प्रस्ताव पर क्या कहा?
ICAI का कहना है कि इससे एकल आय वाले लोगों को व्यक्तिगत छूट सीमा का लाभ उठाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आय साझा करने से रोका जा सकेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को डिफॉल्ट व्यवस्था के तहत 4 लाख और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 2.50 लाख की मूल छूट सीमा का व्यक्तिगत रूप से अधिकार है। हालांकि, अधिकतर अकेले कमाने वाले लोग आय को परिवार के अन्य सदस्यों के हाथों में स्थानांतरित कर टैक्स बचाते हैं।
चुनौती
क्या है ICAI के प्रस्ताव की चुनौतियां?
ICAI का संयुक्त कराधान विवाहित जोड़ों के लिए अच्छी खबर होगी, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई चुनौतियां हैं। मौजूदा टैक्स फाइल करने की प्रणाली व्यक्तियों के लिए बनाई गई है। ऐसे में इसमें बदलाव की आवश्यकता होगी। TOI के अनुसार, अगर विवाहित जोड़ों के लिए छूट की सीमा और कटौतियों को दोगुना या उससे अधिक बढ़ा दिया जाता है, तो लोगों में संयुक्त कराधान के नाम पर टैक्स चोरी करने की प्रवृत्ति के बढ़ने का खतरा रहेगा।
दिशानिर्देश
स्पष्ट दिशानिर्देशों की होगी आवश्यकता
एक ही रिटर्न में दो व्यक्तियों के लिए घर-संपत्ति से होने वाली आय, आवास ऋण पर ब्याज, धारा 80C के तहत निवेश, चिकित्सा बीमा कटौती आदि जैसी श्रेणियों से निपटने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता होगी। अगर, पति-पत्नी दोनों की आय अधिक है, तो संयुक्त कराधान का विकल्प उनके लिए उतना आकर्षक नहीं हो सकता है। इससे वे उच्च आय वर्ग में आ सकते हैं। हालांकि, इससे संयुक्त फाइलिंग की ओर लोगों का आकर्षण बढ़ सकेगा।