
पर्सनल लोन के लिए आंशिक या पूर्व-भुगतान में से क्या चुनें? जानिए दोनों में अंतर
क्या है खबर?
बैंक या लोन देने वाली वित्तीय संस्थाएं पसर्नल लोन के साथ आंशिक भुगतान (पार्ट-पेमेंट) और पूर्व-भुगतान (प्री-पेमेंट) की सुविधा देती है। इनकी मदद से आप अपनी लोन या ब्याज को कम कर सकते हैं। दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि दोनों में कौनसा विकल्प अपनाना सही होगा। इसके लिए आपको दोनों के बीच अंतर समझना होगा। आइये जानते हैं दोनों में से कौनसा भुगतान तरीका सही है।
आंशिक-भुगतान
आंशिक भुगतान के फायदे
आंशिक-भुगतान तब होता है, जब आप अपने बकाया लोन में एकमुश्त बड़ी राशि जमा कराते हैं, जो आपकी नियमित EMI से ज्यादा होती है, लेकिन पूरा लोन चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं होती। जब आपके पास अतिरिक्त आय हो तो यह विकल्प अपना सकते हैं। इससे मूलधन घटने से ब्याज में कमी, लोन की अवधि कम करने के साथ आपकी सुविधा अनुसार कभी भी जमा कराने जैसे फायदे मिलते हैं। इसके अलावा यह क्रेडिट स्कोर को भी बढ़ाता है।
पूर्व-भुगतान
पूर्व-भुगतान के क्या हैं फायदे?
जब आप लोन अवधि समाप्त होने से पहले पूरी बकाया लोन राशि चुका देते हैं तो इसे पूर्व-भुगतान कहा जाता है। आप यह विकल्प EMI को पूरी तरह से बंद करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसमें आपको ज्यादा राशि की जरूरत होती है। इससे आपको हर महीने की EMI बंद होने से तनाव से मुक्ति मिलती है। इससे ब्याज की बचत होगी, जिसे आप दूसरी जगह निवेश कर सकते हैं। इससे क्रेडिट स्कोर में भी सुधार होता है।
नुकसान
क्या हैं पहले भुगतान करने के नुकसान?
दोनों ही विकल्पों के कई फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। कई बैंक पूर्व-भुगतान राशि का 2-5 प्रतिशत तक शुल्क भी लेते हैं। कई बैंक अतिरिक्त भुगतान करने के बाद EMI को कम किए बिना लोन अवधि में कमी करते हैं। पर्सनल लोन ब्याज पर टैक्स में छूट नहीं मिलती है। ऐसे में पूर्व भुगतान से टैक्स कटौती में कोई फायदा नहीं मिलेगा। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए लोन शर्तों पर गौर करना जरूरी है।