नए लेबर कोड के ड्राफ्ट नियमों में गिग वर्कर्स के लिए क्या हैं प्रावधान?
क्या है खबर?
देश में श्रम कानूनों में बड़े बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 4 लेबर कोड पर ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक कर दिया है। केंद्र सरकार चाहती है कि इन सभी कोड को 1 अप्रैल, 2026 से पूरे देश में एक साथ लागू किया जाए। इस पहल का मकसद श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा देना, नियमों को आसान बनाना और रोजगार व्यवस्था को अधिक संगठित करना है।
नियम
गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी के नए नियम
ड्राफ्ट नियमों में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी से जुड़ी अहम शर्तें तय की गई हैं। लाभ पाने के लिए किसी गिग वर्कर को पिछले वित्त वर्ष में कम से कम 90 दिन किसी एक एग्रीगेटर के साथ काम करना होगा। अगर कोई वर्कर कई एग्रीगेटर्स के साथ जुड़ा है, तो उसके कुल काम के दिनों को जोड़कर गिना जाएगा, जिससे ज्यादा लोगों को कवरेज मिल सके।
नियम
काम के दिनों की गिनती को लेकर साफ नियम
सरकार ने साफ किया है कि अगर किसी गिग वर्कर ने किसी दिन एग्रीगेटर से थोड़ी भी कमाई की है, तो उसे एक पूरा कार्यदिवस माना जाएगा। अगर एक ही दिन तीन अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए काम किया गया है, तो उसे तीन दिन गिना जाएगा। इस नए नियम से गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाने में बहुत आसानी होगी और भ्रम की स्थिति भी खत्म होगी।
फीडबैक
राज्यों और स्टेकहोल्डर्स से मांगा गया फीडबैक
केंद्र सरकार ने चारों लेबर कोड पर स्टेकहोल्डर्स और राज्यों से फीडबैक मांगा है। इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड पर 30 दिन और बाकी तीन कोड पर 45 दिन का समय दिया गया है। उद्योग संगठनों ने इसे श्रम सुधारों की दिशा में एक बहुत अहम कदम बताया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च, 2026 तक करीब 100 करोड़ श्रमिकों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज देना है, जिससे वर्कर प्रोटेक्शन मजबूत हो सके।