50 करोड़ के यूनियन बैंक घोटाले में पूर्व अध्यक्ष को मिली जमानत
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अरुण तिवारी को मुंबई की एक अदालत ने 50 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत दे दी है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने एक्सेल मेटल प्रोसेसर्स को ऋण सुविधा देने के लिए बैंक के नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने बिना सही मंजूरी के यह ऋण दिया और बाद में खुद ही उसे मंजूरी भी दे दी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2020 में उनकी जांच शुरू की थी। यह जांच यूनियन बैंक के तत्कालीन उप महाप्रबंधक राजीव मिश्रा की शिकायत पर हुई थी, जिन्होंने तिवारी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रहते हुए लिए गए फैसलों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
अदालत ने सहयोग के आधार पर लगाईं शर्तें
विशेष लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का विरोध किया, लेकिन अदालत ने इस बात पर गौर किया कि तिवारी जांचकर्ताओं के साथ लगातार सहयोग करते रहे हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे के दौरान उनकी उपस्थिति बनी रहे, इसके लिए कुछ शर्तें भी लगाई जाएंगी। तिवारी के वकीलों ने दलील दी कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है, उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और समन मिलने पर वे हमेशा अदालत में पेश हुए।
न्यायाधीश ने इन दलीलों को स्वीकार कर लिया और आगे की सुनवाई में उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कुछ शर्तें तय कर दीं।