यूनियन बैंक ने अमेरिकी बॉन्ड बेचकर 12 साल बाद की वैश्विक बाजार में वापसी
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने वैश्विक बॉन्ड बाजार में वापसी की है। बैंक ने 60 करोड़ डॉलर (करीब 5,700 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। 12 साल से भी ज्यादा समय बाद बैंक ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी डॉलर बॉन्ड्स बेचे हैं।
बैंक ने इस रकम को 2 हिस्सों में बांटा है। पहला हिस्सा 30 करोड़ डॉलर (करीब 2,850 करोड़ रुपये) का है, जो 3 साल के लिए जारी किए गए नोट्स पर है और इस पर 5.23 फीसदी ब्याज तय किया गया है।
दूसरा हिस्सा भी 30 करोड़ डॉलर का है, जो 5 साल के नोट्स के लिए है और इस पर 5.4170 फीसदी ब्याज तय हुआ है। इस कदम से बैंक को उधार लेने की लागत कम रखने में आसानी होगी और वह ज्यादा ग्राहकों को कर्ज दे पाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रियायती हेजिंग सुविधा की वजह से यह सब मुमकिन हो पाया है।
भारतीय बैंकों ने विदेश से जुटाए अरबों डॉलर
यूनियन बैंक ने उम्मीद से बेहतर ब्याज दरें हासिल की हैं, जो उसके शुरुआती लक्ष्य से भी सस्ती थीं। यह उसके लिए एक बड़ी जीत साबित हुई। बैंक एक बड़े चलन का भी हिस्सा है। दरअसल, भारतीय बैंकों ने हाल ही में विदेश से बॉन्ड्स के जरिए 11.25 अरब डॉलर (करीब 1,050 अरब रुपये) जुटाए हैं।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि RBI ने ऐलान किया था कि अनिवासी जमाओं (नॉन-रेजिडेंट डिपॉजिट) के लिए बैंकों को दी गई हेजिंग की समय सीमा 31 अगस्त को तय समय से एक महीना पहले ही खत्म हो जाएगी।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) ने भी साल की शुरुआत में ऐसे ही सौदे किए थे। नए नियमों के तहत फंड जुटाने की होड़ में सभी बैंक तेजी से काम कर रहे हैं।