
ट्रंप टैरिफ का असर, डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
क्या है खबर?
भारतीय रुपया आज 64 पैसे की गिरावट के बाद अब तक के सबसे निचले स्तर 88.2 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया है। फरवरी में इसका पिछला रिकॉर्ड 87.95 रुपये था। कारोबारियों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हल्की डॉलर बिकवाली से दिन में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन रुपया 88 के आसपास ही बना रहा। 2025 में अब तक रुपया करीब 3 प्रतिशत कमजोर हो चुका है और एशिया की सबसे खराब मुद्रा साबित हुआ है।
वजह
अमेरिकी टैरिफ से बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ हैं। वाशिंगटन ने इस हफ्ते 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया, जिससे कुल टैरिफ दर 50 प्रतिशत हो गई। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यदि ये शुल्क लंबे समय तक लागू रहे, तो भारत की GDP वृद्धि दर में 60 से 80 आधार अंकों की कमी आ सकती है। इससे रोजगार और निर्यात पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
घाटा
निवेशकों का भरोसा और व्यापार घाटा
विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इस साल अब तक 9.7 अरब डॉलर (लगभग 850 अरब रुपये) की बिकवाली हुई है। इससे भुगतान संतुलन और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में और गिरावट की आशंका बनी हुई है और 89 रुपये प्रति डॉलर अगला अहम स्तर होगा। अगर निर्यात कमजोर रहा तो आने वाले महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।