RBI ने डिफाॅल्टर्स से जब्त प्रॉपर्टी को लेकर सख्त बनाए नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए कुछ नए नियम बनाए हैं। ये नियम उन संपत्तियों से जुड़े हैं, जिन्हें बैंक उन लोगों से जब्त करते हैं, जो अपना कर्ज (लोन) नहीं चुका पाते।
अक्टूबर से बैंकों के लिए जरूरी होगा कि उनके पास एक स्पष्ट नीति हो, जिसे उनके बोर्ड ने पास किया हो। इस नीति में साफ-साफ लिखा होगा कि बैंक इन संपत्तियों को कैसे हासिल करेंगे, उनकी कीमत कैसे तय करेंगे और उन्हें कैसे बेचेंगे।
इन नियमों में सबसे अहम बात ये है कि बैंक ऐसी जब्त की गई संपत्तियों को 7 साल से ज्यादा अपने पास नहीं रख सकते। उन्हें इस दौरान इन संपत्तियों को बेचना ही होगा।
सार्वजनिक नीलामी को बढ़ावा
बैंकों को कहा गया है कि वे जब्त की गई संपत्तियों को बेचने के लिए सार्वजनिक नीलामी का तरीका अपनाएं। इससे सभी खरीदारों को एक जैसा मौका मिलेगा।
साथ ही, एक बहुत ही सख्त नियम ये भी है कि ऐसी जब्त की गई संपत्ति को न ही तो कर्ज न चुकाने वाले डिफॉल्टर को वापस बेचा जा सकता है और न ही उसके किसी करीबी संबंधी या परिचित को।
RBI का मानना है कि इससे बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और अनुशासन बना रहता है। इन संपत्तियों की कीमत तय करने के लिए बैंकों को 2 विकल्पों में से कम वाली कीमत चुननी होगी। पहला विकल्प है लोन की बची हुई रकम, और दूसरा विकल्प है 2 बाहरी विशेषज्ञों द्वारा लगाई गई वो कीमत, जो संकट की स्थिति में बिक्री के लिए होती है। हालांकि, यह नियम तभी लागू होगा, जब संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक बैंक के पास आ जाए। तब तक सरफेसी जैसे कानूनों के तहत कर्जदारों के अधिकारों की पूरी रक्षा की जाएगी।