अमेरिकी डॉलर की मजबूती से भारतीय रुपये समेत एशियाई मुद्राओं में आई गिरावट
भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.89 पर खुला। यह पिछले बंद भाव से 16 पैसे की गिरावट थी। दरअसल, डॉलर 13 महीने के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने की चर्चाएं तेज हो गईं और निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया।
फिनरैक्स ने बताया कि यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राएं भी कमजोर हुईं, जिससे डॉलर इंडेक्स बढ़कर करीब 101.40 पर पहुंच गया।
थाई बाट को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
मजबूत होते डॉलर का असर सिर्फ भारत पर ही नहीं पड़ा। थाई बाट, चीनी युआन और दक्षिण कोरियाई वॉन जैसी कई एशियाई मुद्राओं में भी गिरावट आई।
इनमें सबसे ज्यादा गिरावट थाई बाट में देखी गई, जो 0.36 फीसदी तक गिर गया, जबकि बाकी मुद्राओं में गिरावट कम रही।
फिनरैक्स ने सलाह दी है कि जब डॉलर की दरें बढ़ें तो निर्यातकों को डॉलर बेचने चाहिए और जब सस्ता हो (लगभग 94.20 के करीब) तो आयातकों को डॉलर खरीदने चाहिए। इस तरह वे मौजूदा अनिश्चित वैश्विक बाजार में अपने जोखिमों को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे।