होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण फिर उछले कच्चे तेल के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़ रही हैं। इसकी मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ता तनाव है, जो दुनियाभर में तेल की आपूर्ति के लिए एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है।
मंगलवार (11 अगस्त) को ब्रेंट क्रूड अब 88 डॉलर (करीब 8,300 रुपये) प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 82.45 डॉलर (करीब 7,800 रुपये) प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
दरअसल, एक दिन पहले ही इसमें 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई थी। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना है, जिससे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं हैं।
तेज की कीमतें और बढ़ने की आशंका
अमेरिका और ईरान के बिगड़े संबंध भी इस अनिश्चितता को बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मांग की है कि ईरान पुराने संघर्षों का हर्जाना भरे और दावा किया है कि अमेरिका ने इलाके से बारूदी सुरंगें हटा दी हैं। दूसरी तरफ, सऊदी अरब में जहाजों पर हमलों और रिफाइनरियों में हो रही देरी से विशेषज्ञ यह चेतावनी दे रहे हैं कि अगर, हालात जल्द नहीं सुधरे तो तेल के दाम काफी बढ़ सकते हैं।
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगर, मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो तेल की कीमतें 120 डॉलर (करीब 11,000 रुपये) प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर, तनाव कम होता है तो इस साल के आखिर तक कीमतें वापस 80 डॉलर (करीब 7,600 रुपये) प्रति बैरल के आस-पास स्थिर हो सकती हैं।