मोटापे के इलाज की दवाओं पर टेलीहेल्थ कंपनियों का पहरा
मोटापा कम करने की लोकप्रिय दवाओं के मामले में अब टेलीहेल्थ कंपनियां एक तरह से पहरेदार का काम कर रही हैं। इससे मरीजों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कैलिफोर्निया में एक पावर प्लांट में काम करने वाले डेविड डेविस को जेपबाउंड दवा लिखी गई थी, लेकिन उनकी कंपनी की बेनिफिट्स टीम ने उनसे विडा हेल्थ से नई पर्ची लाने को कहा।
सारे टेस्ट और सलाह-मशविरे के बाद भी विडा हेल्थ ने डेविड को पहले कुछ जेनेरिक दवाएं आजमाने के लिए मजबूर किया। हैरानी की बात यह थी कि ये दवाएं उनके मोटापे की समस्या से जुड़ी भी नहीं थीं।
कंपाउंडेड जेपबाउंड के लिए खुद पैसे दिए
लगातार हो रही देरी से तंग आकर डेविस ने आखिरकार अपनी जेब से पैसे खर्च कर कंपाउंडेड जेपबाउंड खरीदी। विडा और ओमाडा हेल्थ जैसी टेलीहेल्थ प्रोवाइडर कंपनियां मोटापे के इलाज में एक बड़ी भूमिका निभाने लगी हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि अब कंपनियां दवाओं का खर्च कम करना चाहती हैं।
मगर, उनकी कुछ सख्त नीतियां कई लोगों के लिए जरूरी इलाज पाना और भी मुश्किल बना रही हैं। इससे यह गंभीर चिंता पैदा हो रही है कि कहीं लागत बचाने के चक्कर में मरीजों की सेहत से समझौता तो नहीं किया जा रहा।