AI के बढ़ते बिल के कारण दिग्गज IT कंपनियों ने बदली रणनीति
भारत की 3 दिग्गज IT कंपनियां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), HCL टेक और विप्रो अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रणनीति में बदलाव ला रही हैं।
इसकी वजह टोकन की लगातार बढती लागत है। अब छोटे भाषा मॉडल (SLM) सामान्य काम संभालते हैं, जबकि बडे और जटिल कामों का जिम्मा बडे भाषा मॉडल (LLM) पर है।
यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है, ताकि कंपनियों का काम किफायती और तेज गति से हो सके, खासकर तब जब ज्यादा से ज्यादा कंपनियां एंटरप्राइज AI को अपना रही हैं।
कंपनियों पर कायम है आर्थिक दबाव
HCL टेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सी विजयकुमार ने माना कि टोकन की लागत पहले इतनी कम होती थी कि उस पर ध्यान भी नहीं जाता था, लेकिन अब यह एक चिंता का विषय बन गई है।
इसके जवाब में, कंपनी ने टियर-आधारित AI समाधान पेश किए। नतीजा यह हुआ कि पिछली तिमाही में एडवांस्ड AI से उन्हें 17.10 करोड डॉलर (करीब 1,600 करोड़ रुपये) का राजस्व मिला, जो 10.3 फीसदी की बढोतरी दर्शाता है।
TCS के CEO के कृतिवासन ने भी इस बात पर जोर दिया कि वे काम की जटिलता के अनुसार अलग-अलग मॉडल का उपयोग कर रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम न केवल पैसे बचाएगा, बल्कि SLM ट्रेनिंग जैसी नई सेवाएं शुरू करने का अवसर भी पैदा करेगा।
इन रणनीतिक बदलावों के बावजूद कंपनियों पर आर्थिक दबाव अभी भी कायम है। पिछली तिमाही में TCS का राजस्व स्थिर रहा, वहीं HCL टेक और विप्रो की कमाई में गिरावट दर्ज की गई।
इस साल उनके शेयरों की कीमतों में 26 से 33 फीसदी तक की भारी गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि AI तकनीक IT सेवाओं के भविष्य को किस तरह प्रभावित करेगी।