चंद्रशेखरन के दोबारा अध्यक्ष बनने के फैसले को टाटा ट्रस्ट्स ने दी चुनौती
टाटा ट्रस्ट्स ने एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का अध्यक्ष दोबारा नियुक्त करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बोर्ड का यह फैसला कंपनी के नियमों के मुताबिक नहीं है।
उसका मानना है कि ऐसे बड़े फैसलों के लिए उनके नामित ज्यादातर निदेशकों की सहमति होनी जरूरी है, लेकिन इस बार 2 में से केवल एक निदेशक ने ही इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी। इस वजह से ट्रस्ट इस फैसले को अमान्य मानता है।
कास्टिंग वोट की दलील को भ्रामक बताया
टाटा ट्रस्ट्स ने अध्यक्ष के 'कास्टिंग वोट' वाली दलील को भी गुमराह करने वाला बताया। ट्रस्ट का कहना है कि यह वोट तभी इस्तेमाल किया जा सकता है, जब सभी बोर्ड सदस्यों के वोट बराबर हों और किसी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो जाए।
इसके अलावा, टाटा ट्रस्ट्स ने ऐसे ही मामलों में पहले हुए कानूनी विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने साफ कहा कि इस नेतृत्व विवाद के बावजूद उनका मुख्य ध्यान अभी भी परोपकार और सुशासन पर ही है।