स्विगी के शेयरधारकों ने भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी का दर्जा दिलाने का किया समर्थन
फूड और ग्रोसरी डिलीवरी कंपनी स्विगी को शेयरधारकों से कुल विदेशी हिस्सेदारी को 49.5 फीसदी तक सीमित करने की मंजूरी मिल गई है। उसे करीब 94 फीसदी का समर्थन मिला है।
इससे कंपनी के लिए भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी (IOCC) के तौर पर पात्रता प्राप्त करने का रास्ता साफ हो गया है। यह मंजूरी तब मिली है, जब मई में शेयरधारकों ने इसी तरह के एक प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था।
इन बदलावों में कंपनी के नियमों को अपडेट करना शामिल है, ताकि सह संस्थापक श्रीहर्ष मजेटी और फणी किशन अड्डपल्ली बोर्ड में निदेशकों को नामित कर सकें।
क्यों जरूरी थी यह मंजूरी?
विदेशी हिस्सेदारी 49.5 फीसदी तक सीमित करने की सीमा स्विगी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जरूरी मंजूरी लेने के लिए चाहिए। इन बदलावों से उसका इंस्टामार्ट (क्विक कॉमर्स कारोबार) अब 'इंवेट्री-लेड मॉडल' पर काम कर पाएगा।
इसका मतलब है कि इंस्टामार्ट को अपने स्टॉक पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा, जिससे मुनाफा और काम करने की कार्यक्षमता दोनों में सुधार की उम्मीद है।
कंपनी ने बताया है कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद इस बदलाव में लगभग एक साल का समय लग सकता है।