SEBI की निष्क्रिय कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने की तैयारी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ऐसी कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने की तैयारी में है, जो असल में कोई कारोबार नहीं कर रही हैं।
SEBI का मकसद निवेशकों को 'पंप-एंड-डंप' जैसे घोटालों से बचाना है। इन घोटालों में कुछ चालाक लोग किसी शेयर की कीमत को बेवजह बहुत बढ़ा देते हैं, ताकि बाद में उसे ऊंचे दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा सकें।
इन संदिग्ध गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के लिए नियामक संस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल कर रही है।
SME के लिए सुधारों पर जोर
SEBI के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे का कहना है कि इन कदमों से बाजार में पारदर्शिता और ईमानदारी बढ़ेगी। साथ ही सोशल मीडिया ग्रुप्स से होने वाले जोखिम भी कम होंगे।
बोर्ड एक्सचेंज में लिस्टेड पुरानी छोटी और मध्यम कंपनियों (SME) के लिए भी नियमों में बदलाव करने की योजना बना रहा है। जल्द ही विदेशी निवेशकों के लिए भी कुछ नियम आसान बनाने का सुझाव दिया जाएगा।
खास तौर पर कागजी कार्रवाई और वे कितना निवेश कर सकते हैं, इन पहलुओं को सरल बनाया जाएगा। इसका मकसद भारत के शेयर बाजारों को अधिक सुरक्षित और विदेशी निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बनाना है।