#NewsBytesExplainer: डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, आपकी जेब पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.43 पर आ गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली के चलते रुपये में ये गिरावट देखने को मिल रही है। आज बाजार खुलते ही रुपया डॉलर के मुकाबले 92.33 पर पर खुला और 19 पैसे गिरकर अपने नए निचले स्तर 92.44 पर आ गया। आइए समझते हैं इसका आपकी जेब पर क्या असर होगा।
वजह
सबसे पहले जानिए क्यों गिर रहा है रुपया
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने न्यूज18 से कहा, "ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं। डॉलर सूचकांक में भी वृद्धि हुई, जबकि यूरोपीय और एशियाई मुद्राओं में डॉलर के मुकाबले गिरावट आई।" एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, "कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव डाला है।"
अन्य वजहें
ये कारण भी हैं जिम्मेदार
रुपये में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत वायदा कारोबार में लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 96.57 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसी बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी भारतीय शेयरों की आक्रामक रूप से बिक्री की है। आंकड़ों के अनुसार, 12 मार्च को FII ने शुद्ध आधार पर 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
असर
आप पर क्या होगा असर?
रुपया कमजोर होने से ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई में भी बढ़ोतरी होगी, आयात पर ज्यादा पैसे खर्च करना होंगे और विदेश यात्रा भी महंगी होगी। भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो स्थानीय मुद्रा के हिसाब से तेल महंगा हो जाता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, अभी तक तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
महंगाई
महंगाई भी बढ़ेगी
ईंधन की कीमत बढ़ने का सीधा-सीधा संबंध महंगाई से है। क्योंकि जब ईंधन महंगा हो जाता है, तो वस्तुओं के परिवहन की लागत भी बढ़ जाती है। इससे सब्जियां, खाद्य पदार्थ और रोजाना के इस्तेमाल वाली चीजें महंगी हो सकती हैं। साथ ही रुपये के कमजोर होने से विदेश यात्रा, विदेश में शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय खरीदारी भी महंगी हो जाती है, क्योंकि डॉलर के मुकाबले आपको ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती है।
अन्य प्रभाव
और क्या-क्या होंगे असर?
रुपया कमजोर होने से आयात पर भी असर होगा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रसायन जैसे कई सामानों का आयात करता है। आयातित सामानों की लागत बढ़ जाएगी। रुपये में गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी पड़ता है। शेयर बाजार में आज लगातार तीसरे दिन गिरावट हुई है। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 1,500 अंक की गिरावट के साथ 74े,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 500 अंक की गिरावट आई है।
मुद्रास्फीति
मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी
12 मार्च को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.74 प्रतिशत थी। वहीं, रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहते हैं, तो भारत का चालू बचत घाटा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.9 से 2.2 प्रतिशत तक हो सकता है।