लागत में इजाफा: होर्मुज से माल ढुलाई हुई 200 फीसदी से ज्यादा महंगी
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव की वजह से भारतीय कंपनियों के लिए सामान भेजना काफी महंगा हो गया है। माल ढुलाई का किराया और युद्ध जोखिम शुल्क (वॉर-रिस्क सरचार्ज) जुड़ने से यह खर्च 35 से 50 फीसदी तक बढ़ गया है।
कुछ खेपों में तो यह बढ़ोतरी 200 फीसदी से भी ज्यादा हो गई है। अब यूरोप या खाड़ी देशों में माल भेजने के लिए कई हजार डॉलर ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। इस स्थिति के कारण कंपनियां अपने मौजूदा अनुबंधों (कॉन्ट्रैक्ट्स) पर दोबारा विचार करने को मजबूर हैं।
उद्योगों के लिए कच्चे माल के बढ़े दाम
भारत में गैस की आपूर्ति 25 फीसदी कम हो गई है, जिससे खाद और धातु जैसे उद्योगों के लिए उत्पादन महंगा हो रहा है। पेट्रोकेमिकल का उत्पादन भी 21 फीसदी गिर गया है, जिससे पॉलीप्रोपाइलीन और PVC जैसे कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं।
कपड़ा निर्यातकों के लिए तो हालात और भी बुरे हैं। उनके माल ढुलाई का खर्च 300 फीसदी तक बढ़ गया है और खेप पहुंचने में करीब 10 सप्ताह की देरी हो रही है। इस परेशानी से निपटने के लिए कंपनियां जरूरी सामान जमा (स्टॉकपाइलिंग) कर रही हैं और अपने माल को दूसरे रास्तों से भेज रही हैं।
हालांकि, इस अतिरिक्त खर्च का बोझ आखिर में शायद आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।