RBI ने टाटा संस ने खारिज की डी-रजिस्ट्रेशन की अर्जी, कंपनी को होना होगा लिस्टेड
टाटा संस निजी कंपनी बने रहना चाहती थी, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उसकी यह अर्जी खारिज कर दी। RBI ने 11 सितंबर को एक आवेदन भेजकर टाटा संस के कोर इंवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के दर्जे से हटने के अनुरोध को नामंजूर कर दिया।
इसकी मुख्य वजह यह है कि मार्च तक टाटा संस की संपत्ति 2.01 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो 1 लाख करोड़ रुपये की तय सीमा से कहीं ज्यादा है। ऐसे में अब कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना लगभग तय माना जा रहा है।
5 साल तक NBFC-UL का दर्जा
जून से RBI के नए नियम लागू हुए हैं, जिनके तहत टाटा संस को कम से कम 5 साल तक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी-अपर लेयर (NBFC-UL) के कड़े नियमों के दायरे में रहना होगा।
भले ही कंपनी ने खुद को इस दायरे से बाहर निकालने के लिए अपना सारा कर्ज चुका दिया था, लेकिन उनकी बड़ी संपत्ति की वजह से वे अभी भी NBFC-UL की श्रेणी में ही रहेंगी। जुलाई, 2025 में टाटा ट्रस्ट्स ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें होल्डिंग कंपनी को निजी ही रखने की बात कही गई थी।
दूसरी तरफ, टाटा संस में सबसे बड़े अल्पसंख्यक शेयरधारक, शापूरजी पालोंजी ग्रुप कंपनी के सार्वजनिक लिस्टिंग के पक्ष में है। उन्हें उम्मीद है कि इससे उनकी संपत्ति का सही मूल्य सामने आएगा और वे अपना 60,000 करोड़ रुपये का भारी कर्ज भी चुका पाएंगे।