क्विक कॉमर्स की 10-मिनट डिलीवरी बंद, लोग भी नहीं मानते इसे बहुत जरूरी सेवा- सर्वे
क्या है खबर?
केंद्र सरकार द्वारा क्विक कॉमर्स कंपनियों से '10-मिनट' डिलीवरी के वादे का प्रचार बंद करने को कहने के बाद इस मॉडल पर बहस और चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच आए एक नए सर्वे में सामने आया है कि ज्यादातर ग्राहक इतनी तेज डिलीवरी को जरूरी नहीं मानते। सर्वे के मुताबिक, लोग चाहते हैं कि डिलीवरी सुरक्षित हो, समय का दबाव न हो और सिर्फ बेहद जरूरी चीजों तक ही सीमित रखी जाए।
सर्वे
सर्वे में क्या बोले लोग?
लोकलसर्कल्स के सर्वे में क्विक कॉमर्स सर्विस का इस्तेमाल करने वाले 38 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि उन्हें 10 मिनट में किसी भी तरह के सामान की डिलीवरी नहीं चाहिए। सर्वे में शामिल 25,000 से ज्यादा ग्राहकों से पूछा गया कि अगर 10-मिनट डिलीवरी हो, तो उसमें क्या मिलना चाहिए? सभी ने दवाओं को पहली प्राथमिकता दी, जरूरी सामान दूसरे और गैर-जरूरी चीजों को आखिरी स्थान पर रखा गया।
समर्थन
सरकारी फैसले को मिला व्यापक समर्थन
सर्वे में यह भी पूछा गया कि क्या लोग सरकार के उस फैसले का समर्थन करते हैं, जिसमें 10-मिनट डिलीवरी की ब्रांडिंग हटाने की बात कही गई है। जवाब देने वालों में से 74 प्रतिशत लोगों ने सरकार के कदम को सही और जरूरी बताया। कई लोगों का मानना है कि बहुत तेज डिलीवरी के दबाव से राइडर्स की सड़क सुरक्षा, मानसिक तनाव और सेहत पर सीधा असर पड़ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
दिशा
कंपनियों पर असर और आगे की दिशा
सरकारी दखल और बढ़ते दबाव के बाद ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट जैसी बड़ी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10-मिनट डिलीवरी का दावा हटाना शुरू कर दिया है। लेबर यूनियनों ने भी सरकार और कंपनियों के इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे कंपनियों को स्पीड के बजाय सेफ्टी, भरोसे, बेहतर वर्किंग कंडीशन और ज़रूरी सेवाओं पर ज़्यादा ध्यान देना होगा।