2050 तक AI डाटा सेंटर्स पर खर्चा हो जाएगा 31.6 लाख करोड़ डॉलर, PwC का खुलासा
प्राइसवाॅटरहाउस कूपर्स (PwC) की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लोकप्रियता के चलते 2050 तक दुनियाभर के डाटा सेंटरों पर कुल 31,600 अरब डॉलर (करीब 30 लाख अरब रुपये) का भारी भरकम खर्च किया जाएगा।
इस साल करीब 800 अरब डॉलर (करीब 75,000 अरब रुपये) का सालाना निवेश 2050 तक दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 1.8 लाख करोड़ डॉलर (करीब 170 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस बड़ी रकम का ज्यादातर हिस्सा AI से जुड़े हार्डवेयर जैसे GPUs, सर्वर और नेटवर्क उपकरणों पर खर्च होगा।
अमेरिका निवेश की योजनाओं में सबसे आगे
इस निवेश की योजना में अमेरिका सबसे आगे है, जिसने 15.1 लाख करोड़ डॉलर (करीब 1,400 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बनाई है।
उसके बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र 8.2 लाख करोड़ डॉलर (करीब 775 लाख करोड़ रुपये), यूरोप 5.6 लाख करोड़ डॉलर (करीब 530 लाख करोड़ रुपये), मध्य पूर्व 1.1 लाख करोड़ डॉलर (करीब 100 लाख करोड़ रुपये) और अफ्रीका 255 अरब डॉलर (करीब 24,000 अरब रुपये) के साथ आते हैं।
बिजली की कमी, डाटा से जुड़े सख्त नियम और चिप की सप्लाई से जुड़ी समस्याएं इन बड़ी योजनाओं को धीमा कर सकती हैं। इस साल की शुरुआत में स्थानीय विरोध के कारण 130 अरब डॉलर (करीब 12,000 अरब रुपये) के कई प्रोजेक्ट रुक गए थे या उनमें देरी हो गई थी।
यह घटना हमें साफ तौर पर याद दिलाती है कि अगर, हम AI से चलने वाले इस भविष्य को हकीकत बनाना चाहते हैं तो भरोसेमंद बिजली और चिप तक आसान पहुंच होना बेहद जरूरी है।