चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने पर क्यों हो रहा विवाद?
टाटा संस का एन चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन बनाने का फैसला बोर्डरूम में बड़े विवाद की वजह बन गया है। 17 सितंबर को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने साफ कहा कि इस बार की प्रक्रिया 2022 में अपनाए गए तरीके से बिल्कुल अलग है।
ट्रस्ट्स का कहना है कि उनके नामांकित निदेशकों ने इस फैसले पर जरूरी बहुमत से अपनी सहमति नहीं दी है। ऐसे में केवल चेयरमैन के कास्टिंग वोट (अंतिम निर्णायक वोट) का इस्तेमाल करना सही नहीं है।
नियमों की व्याख्या पर विवाद
यह पूरा विवाद दरअसल कंपनी के कुछ खास नियमों यानि अनुच्छेद 104B, 118 और 121 की व्याख्या को लेकर ही है। अनुच्छेद 121 साफ कहता है कि इस तरह के बड़े फैसलों के लिए ट्रस्ट द्वारा नामांकित निदेशकों की मंजूरी मिलना बहुत जरूरी है।
दूसरी तरफ, टाटा संस का दावा है कि अनुच्छेद 118 केवल नई नियुक्तियों पर लागू होता है, न कि किसी को दोबारा नियुक्त करने पर।
इसी तर्क के साथ वे मानते हैं कि उनका मौजूदा तरीका बिल्कुल ठीक है, लेकिन पहले आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने भी ऐसी पेचीदा स्थितियों को पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया है। इसी वजह से दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि नियमों का सही पालन कैसे माना जाए?