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मध्य पूर्व में तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सुबह-सुबह सेंसेक्स 2,700 अंक टूटा
मध्य पूर्व में तनाव से शेयर बाजार में भूचाल

मध्य पूर्व में तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सुबह-सुबह सेंसेक्स 2,700 अंक टूटा

Mar 02, 2026
09:38 am

क्या है खबर?

भारतीय शेयर बाजार में आज (2 मार्च) सुबह-सुबह भारी गिरावट देखने को मिल रही है। बाजार खुलने के कुछ ही देर बाद सेंसेक्स 2700 अंकों तक टूटकर 78,543 के स्तर पर खुला। हालांकि, बाद में कुछ सुधार हुआ और यह करीब 1000 अंकों की गिरावट के साथ 80,300 के आसपास ट्रेड करता दिखा। निफ्टी भी 500 अंक तक लुढ़ककर 24,645 के स्तर पर पहुंचा, फिर नुकसान घटाते हुए 24,900 के पास कारोबार करता नजर आया है।

तनाव

मध्य पूर्व तनाव से बढ़ी घबराहट

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने निवेशकों की चिंता और घबराहट दोनों बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज होने से वैश्विक बाजारों में डर और अस्थिरता का माहौल बन गया है। आशंका है कि यह संघर्ष और फैल सकता है, जिससे तेल सप्लाई, शिपिंग रूट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ेगा। इसी अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं और भारतीय बाजार से भी तेजी से पैसे निकाल रहे हैं।

तेल

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर (लगभग 7,200 रुपये) प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी तेल 75 डॉलर के करीब कारोबार करता दिखा। तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल काफी बढ़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने, परिवहन लागत बढ़ने और रुपये पर अतिरिक्त दबाव आने का खतरा रहता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार के निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है।

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रुपया

रुपया कमजोर, विदेशी निवेशकों की बिकवाली

तेल महंगा होने और वैश्विक तनाव बढ़ने के बीच भारतीय रुपया भी लगातार कमजोर होता दिख रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के पार चला गया, जो एक महीने में पहली बार देखा गया स्तर है। कमजोर रुपये का मतलब है कि आयात महंगा होगा और कंपनियों की लागत और मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ हफ्तों में लगातार बड़ी मात्रा में शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

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चिंता

मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद चिंता

हाल के आंकड़ों के मुताबिक, अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है और घरेलू मांग मजबूत दिख रही है, फिर भी बाजार में चिंता कम नहीं हुई है। वजह यह है कि महंगाई और तेल की कीमतों में उछाल से भविष्य की कमाई और सरकारी खर्च पर असर पड़ सकता है। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो व्यापार घाटा बढ़ सकता है और बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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