चिप 20 फीसदी महंगी होने से भारतीय IT कंपनियों की मुश्किलें बढ़ी
बीते एक साल में मेमोरी और चिप की कीमतें 20 फीसदी तक बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर भारतीय IT कंपनियों पर दिख रहा है क्योंकि बड़े उत्पादों में मुनाफा कमाना अब उनके लिए चुनौती बन गया है।
टेक महिंद्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मोहित जोशी कहते हैं कि बढ़ते खर्चों के चलते अब वह लंबे समय के अनुबंधों के लिए तय कीमतों का वादा नहीं कर सकते।
हार्डवेयर की कमी से प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी
पश्चिमी एशिया में चल रहे राजनीतिक तनावों ने हार्डवेयर की कमी और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को और गंभीर बना दिया है।
LTM लिमिटेड के वेंकटेश लाम्बू बताते हैं कि इन मुश्किलों के कारण 33 करोड़ डॉलर (करीब 3,100 करोड़ रुपये) का एक सरकारी प्रोजेक्ट भी धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए HCL जैसी कंपनियां नए डाटा सेंटर्स में पैसा लगा रही हैं और GPU रेंटल मार्केट पर अपना दांव खेल रही हैं।
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद बड़ी कंपनियों ने पिछली तिमाही में अरबों का कारोबार किया। यह दर्शाता है कि यह उद्योग मुश्किल हालात में भी कितनी मजबूती से खड़ी है।