ISRO में नौकरी ठुकराकर मनोज मीना ने खड़ी की 958 करोड़ रुपये की कंपनी
राजस्थान के ग्रामीण इलाके से निकलकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे तक पहुंचे मनोज मीना ने एक ऐसा कदम उठाया, जो कम ही लोग उठाते हैं।
उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में मिली एक सुरक्षित नौकरी को ठुकराकर अपने स्टार्टअप के सपने को पूरा करने का फैसला किया।
2012 में उन्होंने एटमबर्ग टेक्नोलॉजीज की नींव रखी और अगले ही साल 2013 में सिबाब्रत दास भी उनके साथ जुड़ गए। आज एटमबर्ग भारत के कंज्यूमर टेक बाजार में एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है।
BLDC पंखे ने बाजार में मचाया धमाल
एटमबर्ग ने शुरू में छोटे-मोटे इंजीनियरिंग उत्पादों पर काम किया, लेकिन 2015 में कंपनी को बड़ी सफलता मिली। उन्होंने ऊर्जा बचाने वाला BLDC सीलिंग फैन बाजार में उतारा, जो सामान्य पंखों के मुकाबले करीब 65 फीसदी कम बिजली इस्तेमाल करता था। इस नए और अनोखे आइडिया ने एक ऐसे बाजार में हलचल पैदा कर दी थी, जिसमें सालों से कोई बड़ा बदलाव नहीं आया था।
2019 में कंपनी बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन सही वक्त पर मिली फंडिंग ने उन्हें फिर से खड़ा कर दिया। वित्त वर्ष 2025 तक एटमबर्ग का सालाना राजस्व करीब 958 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कंपनी ने इस बीच मिक्सर ग्राइंडर और वॉटर प्यूरीफायर जैसे नए उत्पाद सेगमेंट्स में भी कदम रखा है।