ऑटो कंपनियों में 90 फीसदी अस्थायी कर्मचारी, रिपोर्ट में जताई यह चिंता
एक रिपोर्ट बताती है कि मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी बड़ी भारतीय कार कंपनियों में अब लगभग 90 फीसदी कर्मचारी अस्थायी हैं।
यह बदलाव पिछले 4 वित्तीय वर्षों में देखने को मिला है, जब इन कंपनियों ने अपना उत्पादन बढ़ाया। अस्थायी कर्मचारियों को काम पर रखने से कंपनियों को लागत कम रखने में मदद मिलती है, लेकिन जानकार चेतावनी देते हैं कि इससे टीम की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। साथ ही, फैक्टरी चलाने में भी काफी मुश्किलें आ सकती हैं।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने बढ़ाई न्यूनतम मजदूरी
इतने ज्यादा अस्थायी कर्मचारियों के कारण ऑटो सेक्टर को मजदूरों की कमी और मजदूरी को लेकर विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है।
विरोध-प्रदर्शनों के बाद हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को न्यूनतम मजदूरी बढ़ानी पड़ी है, लेकिन अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता के कारण उत्पादन को स्थिर बनाए रखना मुश्किल हो गया है।
मिलेनस्ट्रेट एडवाइजरी एंड रिसर्च के संस्थापक विनय पिपरसानिया ने इस बारे में कहा, "कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए मजदूरों ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को लागत संभालने और उत्पादन के हिसाब से कर्मचारियों को एडजस्ट करने की सुविधा दी है, लेकिन जब किसी फैक्ट्री में 85-90 फीसदी कर्मचारी अस्थायी हों तो कौशल, अनुभव, उत्पादकता और अनुशासन को बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता है।"