महाराष्ट्र का कर्जा 1.81 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, CAG ने जताई चिंता
महाराष्ट्र का बजट के बाहर का कर्ज बढ़कर 1.81 लाख करोड़ रुपए हो गया है और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने इसकी बढ़ती रफ्तार पर चिंता जताई है।
राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 51,700 करोड़ रुपए की ऋण गारंटी जारी की हैं, जिससे कुल कर्ज पिछले साल के 1.44 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर अब 1.81 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ये गारंटी अब महाराष्ट्र के कुल कर्ज 11.03 लाख करोड़ रुपए का 16 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा बन गई हैं।
कर्ज GSDP के 25 फीसदी से ज्यादा
इस बढ़े हुए कर्ज का बड़ा हिस्सा विरार-अलिबाग और मुंबई की सड़कों जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगाया जा रहा है। इसके अलावा, नागपुर में जमीन के विकास में भी यह पैसा खर्च हो रहा है।
कुछ कर्ज तो राजनेताओं से जुड़े सहकारी चीनी कारखानों को भी दिए गए हैं। इन्हीं कारणों से महाराष्ट्र का कर्ज- सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) अनुपात 25 फीसदी से ऊपर चला गया है, जो तय वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM एक्ट) सीमा 25 फीसदी से काफी ज्यादा है। CAG ने आगाह किया है कि अगर, ऋण पर निर्भरता ऐसे ही बनी रही तो राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।