भारत में डाटा सेंटर्स से वित्त वर्ष 2035 तक आएगा 90 अरब डॉलर का निवेश
भारत में डाटा सेंटर का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। KPMG की एक रिपोर्ट बताती है कि वित्तीय वर्ष 2035 तक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए इस सेक्टर में 90 अरब डॉलर (करीब 8,550 अरब रुपये) का बहुत बड़ा अवसर पैदा होगा।
वित्तीय वर्ष 2030 तक यह अवसर 30 अरब डॉलर (करीब 2,850 अरब रुपये) तक पहुंचने की उम्मीद है। 2030 तक डाटा सेंटर की क्षमता बढ़कर 7 से 7.5 गीगावाट (GW) हो जाएगी, जिससे यह अवसर 3 गुना बढ़ सकता है। इस तेजी के कारण निर्माण, बिजली व्यवस्था, कूलिंग टेक्नोलॉजी, नेटवर्किंग और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त मांग पैदा हो रही है।
आसान शब्दों में कहें तो डिजिटल जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए जिन भी चीजों की जरूरत होती है, उनकी मांग बढ़ रही है।
डिजाइन और निर्माण में सबसे बड़ा अवसर
वित्तीय वर्ष 2035 तक कुल अवसरों में डिजाइन और निर्माण का सबसे बड़ा हिस्सा होगा, जो 27 अरब डॉलर (करीब 2,550 अरब रुपये) का है। कूलिंग सिस्टम 24 अरब डॉलर (करीब 2,250 अरब रुपये) का योगदान देंगे, जबकि आंतरिक बिजली ढांचा से 18 अरब डॉलर (1,700 अरब रुपये) का अवसर मिलेगा।
बाहरी बिजली व्यवस्था में 12 अरब डॉलर (करीब 1,140 अरब रुपये) का निवेश देखा जा रहा है, वहीं नेटवर्किंग और सुरक्षा समाधान से प्रत्येक को 5-5 अरब डॉलर (करीब 475-475 अरब रुपये) का योगदान मिलेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी इस सेक्टर में बड़े बदलाव ला रहा है। AI के भारी वर्कलोड को संभालने के लिए ज्यादा आधुनिक कूलिंग और पावर सेटअप की जरूरत पड़ रही है।
आधुनिक तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता
रिपोर्ट बताती है कि सिविल कंस्ट्रक्शन और फाइबर-ऑप्टिक उत्पादन में भारत के पास अच्छी क्षमता है, लेकिन आधुनिक तकनीक के लिए देश को अभी भी दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 तक इस सेक्टर को बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। ऐसे में स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करना और सभी हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना बेहद अहम होगा।