उत्पादकता 30 फीसदी बढ़ाने से भारत की मैन्युफैक्चरिंग में आ सकता है 35 फीसदी उछाल
KPMG की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर कर्मचारी की काम करने की क्षमता बढ़ाने से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी रफ्तार मिल सकती है।
रिपोर्ट कहती है कि अगर, फैक्ट्रियां अपनी उत्पादकता 30 फीसदी तक बढ़ा लेती हैं तो अकेले यह कदम सेक्टर के भविष्य के कुल उत्पादन में करीब 35 फीसदी तक का योगदान दे सकता है।
इससे लंबे समय में बेहतर मुनाफा, ज्यादा उत्पादन और बाजार में मजबूत मुकाबले की ताकत जैसे कई फायदे मिलेंगे।
बड़े मैन्युफैक्चरर्स को बदलाव करने की जरूरत
KPMG ने पिछले 10 साल में 130 से ज्यादा बड़ी भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर रिसर्च की। इसमें सामने आया कि जिन कंपनियों ने अपनी उत्पादकता तेजी से बढ़ाई, उनके मुनाफे में हर साल करीब 10-11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
दूसरी कंपनियों का मुनाफा केवल 7 फीसदी ही बढ़ पाया, लेकिन इसमें एक बड़ी चुनौती भी है। 70 फीसदी से ज्यादा बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को अभी भी बाकी कंपनियों की बराबरी करने के लिए बड़े बदलाव लाने होंगे।
कई छोटी या असंगठित यूनिट्स तो दिग्गज कंपनियों के मुकाबले प्रति कर्मचारी 5वें हिस्से से भी कम उत्पादन करती हैं। ऐसे में इस बड़े अंतर को खत्म करना भारत के लिए बहुत जरूरी है, ताकि वह दुनिया के मंच पर अपनी असली ताकत दिखा सके।