मेटा से निकाले गए प्रबंधक ने कंपनी के खिलाफ किया मुकदमा
मेटा के पूर्व प्रबंधक जेम्स टिलिंघैस्ट ने नौकरी से निकाले जाने के बाद कंपनी पर मुकदमा कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने एक ऐसे इमिग्रेशन पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था, जिसमें उन्हें लगा कि एक कर्मचारी की उपलब्धियों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था।
इस पत्र में एक कर्मचारी को 63.80 करोड़ डॉलर (करीब 6,000 करोड़) के विज्ञापन राजस्व का श्रेय दिया गया था। साथ ही, उसके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल बनाने और बड़े नेतृत्व भूमिका निभाने का भी दावा किया गया था। हालांकि, टिलिंघैस्ट का कहना है कि ये सारे काम असल में टीम के सामूहिक प्रयास थे।
भेदभाव का लगाया आरोप
इस पत्र पर अपना विरोध जताने के बाद और सुधार के सुझाव देने के बावजूद, टिलिंघैस्ट का कहना है कि मेटा ने काम से जुड़ी उनकी पहुंच सीमित कर दी।
इसके बाद, कंपनी ने खराब प्रदर्शन का हवाला देकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया, जिसे टिलिंघैस्ट सरासर गलत मानते हैं। अब उन्होंने मेटा पर 10 लाख डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपये) से ज्यादा के हर्जाने के लिए मुकदमा किया है।
उनका आरोप है कि मेटा ने इमिग्रेशन सपोर्ट से जुड़े मामलों को जिस तरह से हैंडल किया, उसमें बदले की कार्रवाई और भेदभाव किया गया।
यह मामला टेक कंपनियों में कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता और काम के माहौल को लेकर चल रही चिंताओं को फिर से उजागर करता है।