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क्या शेयरों के बदले लोन लेना सही? जानिए कैसे करता है काम
बैंक शेयरों को गिरवी रखकर लोन देती है

क्या शेयरों के बदले लोन लेना सही? जानिए कैसे करता है काम

Jan 27, 2026
09:51 pm

क्या है खबर?

आपको तत्काल नकदी की आवश्यकता है और आपके पास शेयरों का अच्छा पोर्टफोलियो है तो आप अपने बेचने के बजाय शेयरों के बदले ऋण (LAS) का विकल्प चुन सकते हैं। इस सुविधा के तहत व्यक्ति अपने शेयरों को गिरवी रखकर बैंकों या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) से धनराशि उधार ले सकते हैं। इस प्रकार के लोन से जुड़े विशिष्ट नियमों और बाजार जोखिमों पर सावधानीपूर्वक नजर रखना आवश्यक है। आइये जानते हैं शेयरों के बदले लोन कैसे काम करता है।

तरीका 

इस तरह से मिलता है लोन 

इस सुविधा में शेयर आपके नाम पर ही रहते हैं। लोन चुकाने के बाद शेयर फिर से पूरी तरह आपके कंट्रोल में आ जाते हैं। इस सुविधा के लिए निवेशक को बैंक या फाइनेंस कंपनी के पास आवेदन करना होता है। आपको अपने डीमैट अकाउंट की जानकारी देनी होती है। इसके बाद कंपनी आपके शेयरों की वैल्यू देखती है और आमतौर पर 50-70 फीसदी तक लोन मंजूर करती है। डिजिटल प्रक्रिया से जल्द ही पैसा खाते में आ जाता है।

ब्याज दर 

मिल सकती है कम ब्याज दर  

आमतौर पर बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों के ब्लू-चिप स्टॉक्स पर ही लोन दिया जाता है। इसके अलावा म्यूचुअल फंड और ETF पर भी यह सुविधा मिल सकती है। जोखिम भरे या बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले शेयरों पर लोन नहीं मिलता। शेयर के बदले मिलने वाले लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन से कम होती है। यह दर 9 से 12 फीसदी के बीच हो सकती है, जो बैंक और आपके प्रोफाइल पर निर्भर करती है।

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ओवरड्रॉफ्ट 

ओवरड्रॉफ्ट की मिलती है सुविधा 

इस तरह के लोन की अवधि 1-3 साल तक होती है। कुछ मामलों में ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधा भी मिलती है, जिसमें आप जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकते हैं और केवल उपयोग की गई राशि पर ही ब्याज देना होता है। लोन के दौरान शेयर की कीमत बहुत ज्यादा गिर जाती है तो बैंक आपसे अतिरिक्त शेयर गिरवी रखने या कुछ रकम चुकाने के लिए कह सकता है। ऐसा नहीं करने पर बैंक शेयर बेचकर पैसा वसूल सकती है।

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फायदा-नुकसान 

क्या हैं इस विकल्प के फायदे-नुकसान?

इस लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको निवेश तोड़ना नहीं पड़ता। आप बाजार में बने रहते हैं और शेयर की वैल्यू बढ़ने का फायदा भी उठा सकते हैं। साथ ही यह टैक्स प्लानिंग के लिहाज से भी बेहतर हो सकता है, क्योंकि शेयर बेचने पर लगने वाला कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता। नुकसान की बात करें तो शेयरों की कीमत गिरने पर नुकसान उठाना पड़ता है। भुगतान नहीं करने पर बैंक गिरवी शेयर बेच सकती है।

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