भारत की मैन्युफैक्चरिंग PMI 4 साल में दूसरा सबसे सुस्त, जानिए क्या है वजह
जून में भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर 4 साल में दूसरी सबसे धीमी रही है। इसका परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मई के 55.0 से गिरकर 54.2 पर पहुंच गया।
यह दिखाता है कि वस्तुओं की मांग अब घट रही है। हालांकि, PMI 50 अंक से ऊपर है, ऐसे में तकनीकी रूप से देखें तो यह क्षेत्र अभी भी विकास कर रहा है।
भारतीय निर्माताओं के ऑर्डर और निर्यात में गिरावट
नए ऑर्डर और निर्यात बिक्री दोनों में ही गिरावट दर्ज की गई। खासकर, यूरोप से मांग कम होने के कारण निर्यात पर अधिक असर पड़ा है। ज्यादातर निर्माताओं ने सतर्कता बरती और अपने उत्पादों के दाम नहीं बढ़ाए।
हालांकि, रसायन और धातु जैसे कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं, लेकिन महंगाई में कुछ राहत मिली है।
कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया भी सुस्त पड़ी है। लगभग सभी कंपनियों ने अपने मौजूदा कर्मचारियों के साथ ही काम चलाया। भविष्य की मांग को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते कारोबारियों का विश्वास भी डगमगा गया है।