भारत में AI को बढ़ावा मिलने में प्रतिभा पलायन और निवेश की कमी बड़ी बाधा
भारत को विश्व-स्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दिग्गज तैयार करने में अब भी दिक्कत आ रही है। इसकी मुख्य वजह है कि यहां की बेहतरीन प्रतिभाएं अच्छे वेतन के लिए अक्सर विदेश चली जाती हैं।
साथ ही, घरेलू निवेशक महंगे और लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने से हिचकिचाते हैं। मेनो वेंचर्स के जनरल पार्टनर डीदी दास का कहना है कि फाउंडेशनल AI के लिए शुरुआत में बहुत ज्यादा निवेश और सब्र की जरूरत होती है। इसका मुनाफा मिलने में कई साल लग सकते हैं, जिससे देश में ऐसे प्रोजेक्ट्स को निवेशकों का समर्थन मिलना मुश्किल हो जाता है।
इंडिया AI मिशन में 20 फाउंडेशन-मॉडल प्रस्तावों का चयन
इसके बावजूद, भारत वास्तविक दुनिया के लिए AI टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में काफी प्रगति कर रहा है। सरकार के इंडिया AI मिशन ने पहले ही 20 स्वदेशी फाउंडेशन-मॉडल प्रस्तावों को चुन लिया है।
इसके अलावा, स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 237 प्रोजेक्ट्स के लिए सब्सिडी वाले कंप्यूट को भी मंजूरी दी गई है। विस्पर जैसे स्टार्टअप्स भी अब सुर्खियां बटोर रहे हैं।
इस महीने की शुरुआत में मेनो वेंचर्स ने विस्पर में 28 करोड़ डॉलर (करीब 2,600 करोड़ रुपये) के निवेश राउंड का नेतृत्व किया, जिसके बाद इसका मूल्यांकन 2 अरब डॉलर (करीब 190 अरब रुपये) तक पहुंच गया। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि भारत में बने AI ऐप का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।