शेयर बाजार में नई नीलामी आधारित शेयर-मूल्य प्रणाली की बड़ी परीक्षा
भारत की नई नीलामी-आधारित शेयर-मूल्य प्रणाली मंगलवार (25 अगस्त) को एक बड़ी परीक्षा से गुजरेगी। यह परीक्षा मासिक डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी के दौरान होगी।
यह नई प्रणाली 3 अगस्त को लॉन्च होने के बाद से सामान्य कारोबारी दिनों और साप्ताहिक एक्सपायरी में तो ठीक काम कर रही है, लेकिन इस बार इसे 'फिजिकली सेटल्ड सिंगल-स्टॉक ऑप्शन' से निपटना होगा। इससे शेयरों की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं और हेरफेर की चिंता भी बढ़ सकती है।
SEBI ने बढ़ाई ट्रेडिंग की अवधि
जब से यह प्रणाली लागू हुई है, तब से कम हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और प्रोप्रायटरी फर्में इसमें हिस्सा ले रही हैं। इस कारण नीलामी की मात्रा घट गई है।
आर्बिट्राज ट्रेडर्स को भी अपने कई अच्छे मौके गंवाने पड़े हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि अब शेयरों और डेरिवेटिव्स की एक साथ ट्रेडिंग के लिए शाम का समय कम हो गया है। इस व्यवस्था पर नियामकीय एजेंसियां पहले ही बारीकी से नजर रख रही हैं।
पिछले सप्ताह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 2 फर्मों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिनमें जेपी मॉर्गन की एक यूनिट भी शामिल थी। इन पर कीमतों में हेरफेर का आरोप लगा था।
25 अगस्त को ज्यादा जोखिम देखते हुए SEBI ने नीलामी के बाद के ट्रेडिंग घंटों को भी बढ़ा दिया है। इससे निवेशकों को अपनी पोजीशन जरूरत के हिसाब से बदलने का मौका मिलेगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जब बाजार में कामकाज बढ़ेगा तो यह प्रणाली कैसे काम करती है?