भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.93 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
क्या है खबर?
भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। आज (23 जनवरी) रुपया एक बार फिर नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। दिन के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 91.99 तक गिर गया और आखिर में 91.93 पर बंद हुआ। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिससे बाजार और आम लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
विदेशी बिकवाली
डॉलर की मांग और विदेशी बिकवाली बनी बड़ी वजह
रुपये की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह डॉलर की तेज मांग मानी जा रही है। कंपनियां और आयातक बड़ी मात्रा में डॉलर खरीद रहे हैं। इसके साथ ही, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जनवरी में अब तक विदेशी निवेशकों ने 31,334 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। इससे रुपये की मांग कमजोर हुई और डॉलर मजबूत होता चला गया, जिससे रुपया और नीचे फिसल गया है।
शेयर बाजार
शेयर बाजार पर भी साफ दिखा असर
रुपये की गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है। लगातार विदेशी बिकवाली से बाजार में दबाव बना हुआ है। इस महीने निफ्टी 50 करीब 4 प्रतिशत गिर चुका है। शुक्रवार को भी सेंसेक्स 769 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 241 अंक नीचे आ गया है। कमजोर रुपये और बाजार में गिरावट ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है और अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
वैश्विक तनाव
वैश्विक तनाव और आगे की चिंता
वैश्विक स्तर पर भी हालात रुपये के खिलाफ जा रहे हैं। अमेरिका के व्यापार फैसले और रूस-यूक्रेन जैसे तनावों से अनिश्चितता बढ़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कोशिशों से उतार-चढ़ाव कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन रुझान कमजोर ही बना हुआ है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में रुपया 91.35 से 92.25 के बीच रह सकता है। कमजोर रुपया ईंधन और आयातित सामान को महंगा कर सकता है।