जगह किराए पर लेने में भारतीय मैन्युफैक्चरर्स विदेशी कंपनियों से आगे निकले, 34 फीसदी की बढ़ोतरी
भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां इन दिनों तेजी से औद्योगिक जगहें किराए पर ले रही हैं। सैविल्स इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि 2020 से 2025 के बीच मैन्युफैक्चरिंग के लिए लीज पर ली गई जगह में सालाना 34 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ोतरी हुई है।
यह वृद्धि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कहीं ज्यादा है। 2020 में कुल लीज पर ली गई जगह केवल 58 लाख वर्ग फीट थी, जो 2025 में बढ़कर 2.13 करोड़ वर्ग फीट हो गई। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 3.2 करोड़ वर्ग फीट तक पहुंच सकता है।
लीज में ऑटो सेक्टर की 31 हिस्सेदारी
इस मामले में ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे आगे है। 2020 से 2025 के बीच भारतीय मैन्युफैक्चरर्स ने जितनी जगह लीज पर ली, उसमें से 31 प्रतिशत ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर से जुड़ी थी।
इसके बाद इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का नंबर आता है। कंपनियां अब बड़ी यूनिट्स को भी प्राथमिकता दे रही हैं।
2022 में औसत लीज का आकार करीब 71,000 वर्ग फीट था, जो 2025 तक बढ़कर 94,000 वर्ग फीट हो गया। यह सारी हलचल ज्यादातर टियर-2 शहरों में देखने को मिल रही है। पुणे अभी भी सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जबकि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कम लागत की वजह से होसुर और अहमदाबाद जैसे शहर भी अपनी जगह बना रहे हैं। अच्छे दर्जे की सुविधाओं वाली जगहों की मांग भी बढ़ी है क्योंकि कंपनियां अब बेहतर गुणवत्ता वाली जगहें चाहती हैं।