एल्युमीनियम लघु उद्योगों को बचाने के लिए सीमा शुल्क में कटौती की मांग
एल्युमीनियम के अंतिम उत्पाद बनाने वाले निर्माता सरकार से प्राइमरी एल्युमीनियम और स्क्रैप पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) कम करने की मांग कर रहे हैं।
उनका मानना है कि इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर पड़ने वाला बोझ कम हो जाएगा। उद्योग समूहों का कहना है कि प्राइमरी एल्युमीनियम पर 8.25 फीसदी और स्क्रैप पर 2.75 फीसदी जैसी ऊंची ड्यूटी होने की वजह से स्थानीय उत्पादकों को आयात किए जाने वाले महंगे एल्युमीनियम की कीमतों के बराबर चलना पड़ता है।
ऐसे में छोटे व्यवसायों के लिए बाजार में टिके रहना और प्रतिस्पर्धा करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
मुनाफे में 70 फीसदी तक की कमी
पिछले 3 महीनों में कच्चे माल की कीमतें 20 से 35 फीसदी तक बढ़ गई हैं, जबकि पिछले कुछ सालों में MSMEs के मुनाफे में 70 फीसदी तक की भारी कमी आई है।
भारत में प्रति व्यक्ति एल्युमीनियम का इस्तेमाल दुनिया के औसत से काफी कम है। यहां यह 2.5 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 11 किलोग्राम है।
साथ ही, विदेशी व्यापार समझौतों की वजह से तैयार माल लगभग बिना ड्यूटी के बाजार में आ रहा है। इन दोनों वजहों से स्थानीय निर्माताओं को लगता है कि वे मुकाबले में पिछड़ते जा रहे हैं।
यूरोपीय संघ के नए कार्बन नियमों से भारतीय निर्यात को और नुकसान हो सकता है। इसीलिए उद्योग जगत के दिग्गज ड्यूटी में कटौती पर जल्द फैसला लेने की मांग कर रहे हैं, ताकि भारतीय व्यवसायों को बचाया जा सके और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिले।