भारत ने शुरू किया 'समुद्र मंथन', 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर में होगी तेल-गैस की खोज
भारत ने अपनी ऊर्जा की कमी से निपटने और आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए 'समुद्र मंथन' नाम की एक नई पहल शुरू की है।
इस योजना के तहत करीब 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर के विशाल और अभी तक खोजे नहीं गए समुद्री इलाकों को तेल और गैस की खोज के लिए खोला जाएगा।
इन इलाकों में काम करने के लिए निजी कंपनियों से बोली आमंत्रित की जाएगी। अभी देश अपनी जरूरत का सिर्फ 10 फीसदी कच्चा तेल ही पैदा कर पाता है।
यही वजह है कि सरकार यह कदम उठा रही है, ताकि तेल की एक स्थिर सप्लाई सुनिश्चित हो सके। दरअसल, दुनियाभर में चल रहे विवादों और बढ़ती मांग के कारण ऊर्जा संसाधनों पर बहुत दबाव है।
करीब 900 अरब रुपये का होगा निवेश
सरकार तेल और गैस की खोज में 10 अरब डॉलर (करीब 900 अरब रुपये) का बड़ा निवेश कर रही है। इसमें खास तौर पर अंडमान बेसिन जैसे समुद्री इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां शुरुआती ड्रिलिंग से अच्छे नतीजे मिलने की उम्मीद जगी है।
इस काम में तेजी लाने और अपनी विशेषज्ञता को बढ़ाने के लिए भारत, पेट्रोब्रास, टोटलएनर्जीज और एक्सॉनमोबिल जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इसके अलावा, देश रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) और इथेनॉल ब्लेंडिंग में भी काफी निवेश कर रहा है। ऐसा करते हुए सरकार 2070 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी (कार्बन तटस्थता) हासिल करने के अपने लक्ष्य का भी ध्यान रख रही है क्योंकि देश ऊर्जा की जरूरतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।