लाखों रुपये के वेतन के बावजूद AI को लागू करने वाले इंजीनियर्स की भारी कमी
भारत का टेक जगत आजकल काफी गहमागहमी में है। कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को केवल शुरुआती टेस्टिंग से निकालकर सीधे अपने रोज के कामकाज में तेजी से लाना चाहती हैं, लेकिन इस काम के लिए जरूरी हुनरमंद लोग पर्याप्त नहीं हैं।
ऐसे में फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) की खास तौर पर भारी कमी महसूस हो रही है। ये वही लोग होते हैं, जो AI को असल में कंपनियों के सिस्टम में लागू करते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इंजीनियरिंग प्रोग्राम से हर साल ढेर सारे छात्र पास हो रहे हैं, फिर भी ऐसे विशेषज्ञ नहीं मिल रहे।
FDE की मांग 95 फीसदी तक बढ़ी
FDE एकेडमी की हालिया रिपोर्ट बताती है कि कंपनियों को जितने FDE चाहिए, उसकी तुलना में वे उन्हें ढूंढ नहीं पा रही हैं।
AI को कंपनियों के सिस्टम में लागू करने वाले इंजीनियर्स की मांग 95 फीसदी है, जबकि ऐसे हुनरमंद लोग केवल 45 फीसदी ही उपलब्ध हैं।
इसी कमी के चलते इन इंजीनियर्स के वेतन में भारी उछाल आया है। जो लोग अपने करियर की शुरुआत में हैं (0-3 साल का अनुभव) वे सालभर में 32 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। दूसरी तरफ, 15 साल से ज्यादा अनुभव वाले पेशेवरों की कमाई 1.55 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह कमी 2027-28 तक बनी रह सकती है।