ड्रोन क्रांति: भारतीय खेती में तेजी से बढ़ रहा इस्तेमाल, निवेशकों के लिए नया क्षेत्र तैयार
भारतीय खेती में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां निवेशकों का ध्यान सिर्फ बीजों और खाद तक ही सीमित था, अब वे ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक में भी गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ये ड्रोन अब केवल फसलों पर दवा छिड़कने के काम नहीं आते। इनमें लगे कैमरे और सेंसर किसानों को फसल की सेहत की सटीक जानकारी देते हैं। इनकी मदद से किसान समय रहते ही कीड़ों के हमलों, पानी की कमी या पौधों में पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं को पहचान लेते हैं।
किसानों को मिल रहा रियल टाइम डाटा
ड्रोन से मिली रियल टाइम जानकारी से किसान तुरंत और सही निर्णय ले पाते हैं। वे फसल की किसी भी परेशानी को बड़ा रूप लेने से पहले ही पहचान कर उसे ठीक कर लेते हैं। यह छोटे किसानों के लिए खासतौर पर उपयोगी है, जिनके पास पहले महंगी तकनीक अपनाने का अवसर नहीं होता था। आजकल 'ड्रोन-एज-ए-सर्विस' जैसी सुविधाओं और सरकार की 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के चलते देशभर के खेतों में हजारों ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है। इस क्षेत्र में बाजार भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि यह बाजार 2025 में 30.23 करोड़ डॉलर (करीब 2,800 करोड़ रुपये) से बढ़कर 2034 तक लगभग 2.18 अरब डॉलर (करीब 200 अरब रुपये) तक पहुंच जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में ड्रोन पायलट और सर्विस प्रोवाइडर जैसे नए और बेहतर रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं।