भारत ने अमेरिका के 12.5 फीसदी टैरिफ का किया विराेध
केंद्र सरकार ने अमेरिका के उस 12.5 फीसदी टैरिफ का विरोध किया है, जिसे वह भारत से आने वाले सामानों पर लगाने की सोच रहा है।
सरकार का कहना है कि इन भारतीय सामानों का जबरन मजदूरी से कोई लेना-देना नहीं है। 8 जुलाई को हुई एक सुनवाई में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने कहा कि अमेरिकी रिपोर्ट की कार्यप्रणाली कमजोर है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत जबरन मजदूरी के मसले पर बहुत गंभीर है और देश में इसे रोकने के लिए कड़े कानून भी बने हुए हैं।
मिश्रा ने सुझाव दिया कि दोनों देशों को सीधे बातचीत से इस मामले को सुलझाना चाहिए, बजाय इसके कि तुरंत टैरिफ लगा दिए जाएं।
अमेरिका में महंगा होगा भारतीय सामान
भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बताया कि अमेरिका से जो चावल भारत आता है, उसकी कीमत भारत से अमेरिका जाने वाले चावल की कीमत के 3 फीसदी से भी कम है।
इसके अलावा, जबरन मजदूरी को रोकने के लिए पहले से ही कड़े नियम लागू हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) जैसे उद्योग समूहों ने चेतावनी दी है कि इन टैरिफ के कारण अमेरिकी व्यापारियों और ग्राहकों के लिए सामान महंगा हो सकता है। भारत ने साफ किया है कि वह अमेरिका के साथ मिलकर किसी भी वास्तविक चिंता को दूर करने के लिए तैयार है। उसका मानना है कि व्यापार दोनों देशों के लिए बिना किसी नुकसान के निष्पक्ष बना रहना चाहिए।