पैसों की कमी है तो घर को करें रिवर्स मॉर्गेज, जानिए कैसे करता है काम
क्या है खबर?
सेवानिवृत्त के बाद लोगों की आय कम हो जाती है और उन्हें वित्तीय जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उनके लिए उनका घर काम आता है। रिवर्स मॉर्गेज एक ऐसी वित्तीय योजना है, जिसमें 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग अपने घर को बैंक के पास गिरवी रखकर नियमित आय (मासिक/वार्षिक) या एकमुश्त रकम प्राप्त करते हैं और उन्हें अपना घर भी नहीं छोड़ना पड़ता है। आइये जानते हैं रिवर्स माॅर्गेज कैसे काम करता है।
वेतन
होम लोन से कितना अलग है यह तरीका?
होम लोन में आप घर खरीदने के लिए पैसे उधार लेते हैं और हर महीने बैंक को चुकाते हैं, जबकि रिवर्स मॉर्गेज में EMI चुकाने के बजाय बैंक आपको मासिक किश्त, एकमुश्त राशि, क्रेडिट लाइन या सभी के संयोजन के रूप में पैसे देता है। जब मालिक घर छोड़ता है या मृत्यु हो जाती है, तब बैंक घर बेचकर लोन वसूलता है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग अपने स्वामित्व वाले मकान पर इसका लाभ उठा सकते हैं।
मूल्यांकन
बैंक ऐसे तय करती है राशि
बैंक आपके घर के मूल्य का मूल्यांकन करेगा और तय करेगा कि वह कितना लोन देगा। यह आमतौर पर संपत्ति के बाजार मूल्य का एक प्रतिशत होता है और आपकी उम्र पर निर्भर करता है। आपकी उम्र जितनी अधिक होगी संभावित भुगतान उतना ही अधिक होगा, क्योंकि लोन की अपेक्षित अवधि कम होती है। भुगतान अवधि 15 या 20 वर्षों तक हो सकती है। समय के साथ बकाया लोन राशि में ब्याज जुड़ता रहता है।
वसूली
बैंक ऐसे करती है लोन की वसूली
इस प्रकार के लोन का भुगतान उधारकर्ता की मृत्यु के बाद घर की बिक्री होने पर ही करना होता है। ऐसे में उनके कानूनी वारिसों के पास बकाया चुकाने और संपत्ति अपने पास रखने का विकल्प होता है। वे ऐसा नहीं करते हैं तो बैंक वसूली के लिए घर बेच सकता है। इससे प्राप्त राशि लोन से अधिक है तो अतिरिक्त पैसा वारिसों को मिल जाता है, लेकिन कम हुई तो बैंक अन्य संपत्तियों से इसकी भरपाई नहीं कर सकता।