नए IPO में बढ़ जाएगी शेयर अलॉटमेंट की संभावना, जानिए कैसे लगाएं बोली
क्या है खबर?
प्राथमिक बाजार में आए दिन नए आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) दस्तक देते हैं, जिसमें लोगों को निवेश करने और पैसा कमाने का मौका मिलता है। कई बार एक ही दिन में 3-4 निर्गम पेश होते हैं, लेकिन अक्सर रिटेल निवेशकों को बार-बार अप्लाई करने के बावजूद अलॉटमेंट नहीं मिल पाता। अगर, आप भी बार-बार IPO में पैसा लगाते हैं और हर बार निराशा हाथ लगती है, तो आइये जानते बोली लगाने के तरीके, जिससे आपको शेयर का अलॉटमेंट मिल सकेगा।
कारण
इस कारण सभी को नहीं मिलता अलॉटमेंट
हर IPO में अलग-अलग श्रेणी के हिसाब से शेयर रिजर्व होते हैं। रिटेल निवेशकों के लिए 10 से 35 फीसदी हिस्सा तय होता है, लेकिन उस हिस्से की तुलना में कई गुना ज्यादा बोली आती हैं। ऐसे में हर निवेशक को शेयर मिलना मुमकिन नहीं होता। ज्यादातर लोग मानते हैं कि IPO अलॉटमेंट किस्मत का खेल है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। आप कुछ बातों का ध्यान रखकर बोली लगाएंगे तो शेयर मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
शेयरहोल्डर
शेयरहोल्डर श्रेणी में आवेदन का मिलेगा फायदा
अगर, IPO लाने वाली फर्म की मूल कंपनी पहले से सूचीबद्ध है तो उसके शेयर खरीदना फायदेमंद हो सकता है। डीमैट अकाउंट में पैरंट कंपनी का सिर्फ एक शेयर भी आपको शेयरहोल्डर श्रेणी में आवेदन करने का मौका देता है, जिससे अलॉटमेंट की संभावना काफी बढ़ जाती है। कंपनी जिस प्राइस बैंड में शेयर जारी करती है, उसमें हमेशा अपर बैंड पर आवेदन करना बेहतर रहता है। यह निवेशकों को प्राथमिकता दिलाने में मदद करता है।
न्यूनतम बोली
न्यूनतम बोली के साथ अलग-अलग करें आवेदन
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार, 2 लाख रुपये तक के सभी रिटेल एप्लीकेशन बराबर माने जाते हैं।इसलिए, ज्यादा रकम लगाने की बजाय अलग-अलग खातों से न्यूनतम बोली लगाना ज्यादा समझदारी है। एक ही खाते से अधिकतम बोली लगाने की बजाय परिवार के अलग-अलग डीमैट अकाउंट्स से न्यूनतम आवेदन करें। इससे अलॉटमेंट की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। IPO खुलने के शुरुआती दिनों में ही बोली लगाएं, क्योंकि बाद में दिक्कत आ सकती हैं।
ASBA
ASBA तरीके से करें आवेदन
ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म के साथ-साथ बैंक के जरिए एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट (ASBA) तरीके से आवेदन करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इससे एप्लीकेशन रिजेक्ट होने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। गलत पैन नंबर डालने, बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न रखने जैसी छोटी-सी चूक भी आपका आवेदन रिजेक्ट करा सकती है। इसलिए, आवेदन करते समय सभी जानकारी ध्यान से भरें। इन तरीकों से शेयर अलॉटमेंट की संभावना काफी हद तक बढ़ सकती है।